ऑनलाइन फॉर्म-6 में नई अनिवार्य घोषणा पर जॉन ब्रिटास ने उठाए सवाल, मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखा पत्र

नई दिल्ली, 13 जुलाई (आईएएनएस)। राज्यसभा सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास ने चुनाव आयोग द्वारा मतदाता पंजीकरण के लिए ऑनलाइन फॉर्म-6 में जोड़ी गई नई अनिवार्य घोषणा की वैधता पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखा है। उन्होंने इस बदलाव को कानूनी प्रावधानों के अनुरूप नहीं बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की है।

डॉ. ब्रिटास ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने पंजीकरण नियम, 1960 में किसी संशोधन या कानून मंत्रालय की ओर से राजपत्र अधिसूचना जारी किए बिना ही ऑनलाइन फॉर्म-6 में बदलाव कर दिया है।

उन्होंने कहा कि ईसीआईनेट पोर्टल के माध्यम से मतदाता पंजीकरण के लिए अब आवेदकों से यह जानकारी मांगी जा रही है कि वे स्वयं या उनके माता-पिता अथवा दादा-दादी पिछली विशेष गहन पुनरीक्षण में मतदाता सूची में शामिल थे या नहीं। इसके साथ ही पुराने चुनावी रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी भी अनिवार्य की गई है।

सांसद ने कहा कि कोई भी वैधानिक फॉर्म, जो कानून के तहत निर्धारित होता है, उसमें केवल प्रशासनिक निर्देशों या सॉफ्टवेयर में बदलाव के जरिए संशोधन नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि वैधानिक फॉर्म-6 में बदलाव के लिए नियमों में संशोधन और उचित कानूनी प्रक्रिया जरूरी है।

डॉ. ब्रिटास ने कहा, “पोर्टल राजपत्र नहीं होता और सॉफ्टवेयर कोड कानून नहीं होता।” उन्होंने कहा कि यदि इस तरह के बदलावों को अनुमति दी गई, तो भविष्य में मतदाता पंजीकरण से जुड़े किसी भी कानूनी प्रावधान को बिना नियमों में संशोधन और बिना संसदीय निगरानी के बदला जा सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि नई अनिवार्य शर्त से पहली बार मतदान करने वाले युवाओं, प्रवासियों, गोद लिए गए बच्चों, अनाथों और ऐसे नागरिकों को परेशानी हो सकती है, जिनके पास अपने माता-पिता या दादा-दादी के पुराने चुनावी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं।

डॉ. ब्रिटास ने कहा कि संविधान में दिए गए सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के अधिकार को ऐसी तकनीकी बाधाओं के कारण प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए, जिनका कोई वैधानिक आधार नहीं है।

उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की कि ऑनलाइन फॉर्म-6 में जोड़ी गई इस अनिवार्य घोषणा को तुरंत वापस लिया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी पात्र नागरिक का मतदाता सूची में नाम दर्ज होने की प्रक्रिया ऐसी शर्तों के कारण बाधित न हो, जिन्हें कानून का समर्थन प्राप्त नहीं है।

–आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Are you human? Please solve:Captcha


Make Punjab Kesari Your Trusted News Source

पंजाब केसरी एक हिंदी भाषा का समाचार पत्र है जो भारत में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली के कई केंद्रों से प्रकाशित होता है।