Oppositions No Confidence Motion Dismissed : लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाया विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से खारिज हो गया है। इस प्रस्ताव की वोटिंग से पहले गृहमंत्री अमित शाह ने सम्बोधन दिया। उन्होंने विपक्ष को इस मामले में आड़े हाथ लिया। लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला को हटाने को लेकर जोरदार हंगामा चला, ऐसे में गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष के इस प्रस्ताव के विरोध में अपनी बात रखी जिस पर खूब हंगामा हुआ। बता दें अपने सम्बोधन में अमित शाह ने कई बाते कहीं।
उन्होंने कहा, ‘जो लोग इस मुगालते में जीते हैं, वे और छोटा छोटा छोटा होते जाते हैं. जब आप स्पीकर पर सवाल उठाते हो, तब आप विधायी चेतना और गरिमा पर सवालिया निशान लगाते हो. प्रधानमंत्री को हटाने का प्रस्ताव लेकर आइए ना, हम नहीं कहेंगे कि अफसोसजनक है. हम मुद्दों पर चर्चा करेंगे, जवाब देंगे. प्रधानमंत्री को भी हटाया ही जा सकता है. स्पीकर को हटाने के लिए असाधारण परिस्थितियों में किया जा सकता है. यह रोजमर्रा की चीज नहीं है.
अमित शाह ने आगे कहा, ‘जब स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव लंबित हो, तब पीठासीन कार्यवाही का संचालन नहीं करेंगे. तीनों बार यह परंपरा रही कि 14 दिन तक सबने अध्यक्षता करी और चर्चा के समय चेयर पर नहीं रहे. आपकी सरकार में सभी स्पीकर चेयर पर बैठे थे. ओम बिरला नहीं बैठे एक दिन भी. इससे कुछ मोरल ग्रउंड हो नहीं सकता.’
उन्होंने आगे कहा, ‘ओम बिरला की प्रशंसा की जानी चाहिए. 94 सी के तहत असाधारण और गंभीर परिस्थितियों में ही स्पीकर को हटाया जा सकता है. स्पीकर को हटाने के लिए इफेक्टिव मेजॉरिटी चाहिए. यह एक तरह से संरक्षण दिया गया है. यह प्रस्ताव केसी वेणुगोपाल और 119 सदस्यों ने नोटिस दिया. साल 2026 चल रहा है और 2025 लिख दिया, संकल्प ही संलग्न नहीं किया. इनको लगा होगा कि स्पीकर रिजेक्ट कर देंगे. उनके ध्यान में लाया गया तब संकल्प वापस लिया और दूसरा दिया. उस पर भी गौरव गोगोई के ही वास्तविक हस्ताक्षर थे.
गृहमंत्री ने आगे कहा, ‘यहां फोटोकॉपी नहीं चलती है. इतनी भी गंभीरता नहीं है कि नोटिस नियमों के अनुसार लाएं. यह सदन नियमों से चलेगा, किसी पार्टी के नियमों से नहीं. दूसरी बार भी इनको मौका दिया गया कि सुधार लो. चार दशक के बाद जिस नियम का उपयोग करके प्रस्ताव आया, वह नियम के अनुसार ही नहीं है. ये नियम मानते ही नहीं हैं और फिर बोलेंगे कि हमको बोलने नहीं दिया जाता.’
अमित शाह ने कहा कि ये कहते हैं माइक बंद कर दिया जाता है. अभी पप्पू यादव के भाषण के दौरान गिरिराज सिंह बोल रहे थे, उनका भी माइक बंद था मंत्री होने के बाद भी. जो नियमों के विपरीत बोलेगा, उसका माइक बंद ही कर दिया जाना चाहिए. बीएसी में तय हुआ कि इनके प्रस्ताव पर नौ तारीख को चर्चा होगी. ये अपने प्रस्ताव पर चर्चा को भी तैयार नहीं थे, यह इनकी गंभीरता बताता है.
अपने सम्बोधन में गृहमंत्री ने आगे कहा, 80 फीसदी से ज्यादा भाषण स्पीकर के कंडक्ट पर नहीं, सरकार का विरोध करने के लिए हैं. सरकार का विरोध करने के लिए ढेर सारी धाराएं हैं, इसके लिए आप स्पीकर की गरिमा पर सवालिया निशान लगा रहे हो.
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