Protest Against UGC Bill in Jaipur: सुप्रीम कोर्ट ने UGC (यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन) के नए नियमों पर रोक लगा दी है। हालांकि, इन नियमों को पूरी तरह से वापस लेने की मांग अभी भी ज़ोरों पर है। देश भर में कई संगठन इस बिल के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी बीच, राजपूत करणी सेना और विप्र महासभा ने 1 फरवरी, 2026 को जयपुर के शहीद स्मारक पर एक बड़े विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। हालांकि, देशभर में सड़क जाम को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
1 Feb bharat band hai kya: क्या 1 फरवरी को पूरा जयपुर रहेगा बंद?
बता दें कि राजपूत सभा भवन में हुई बैठक में राजपूत समाज, ब्राह्मण समाज, अग्रवाल समाज और कायस्थ समाज के लोग सहित अन्य समाजों ने मिलकर एक संघर्ष समिति बनाने का ऐलान किया है। इस समिति की रणनीति भी ये लोग तय करेंगे। इतना ही नहीं राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने नए UGC नियमों की तुलना ब्रिटिश सरकार द्वारा लाए गए रॉलेट एक्ट से की और कहा कि जब तक UGC इन नए नियमों को वापस नहीं ले लेता, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी।
1 February ko bharat band: 1919 के रॉलेट एक्ट से की UGC एक्ट की तुलना
अध्यक्ष मकराना ने आगे कहा कि UGC के नए नियम हम किसी भी कीमत पर लागू नहीं होने देंगे। इन नियमों के तहत बनी कमेटियों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, महिलाओं और दिव्यांगों के प्रतिनिधि होंगे, लेकिन सामान्य वर्ग की शिकायतों को सुनने वाला कोई नहीं होगा। इसमें अपील, बहस या कानूनी प्रतिनिधित्व का कोई प्रावधान नहीं है, जो ब्रिटिश राज के दौरान 1919 के रॉलेट एक्ट की याद दिलाता है।
Protest Against UGC New Rule: मकराना ने SC के फैसलों का किया स्वागत
राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करते हैं और यूजीसी के नए नियमों पर लगे स्टे का स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि इन नियमों के खिलाफ देशभर में सभी संगठनों को साथ लेकर आंदोलन किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित रहे।
Protest Against UGC Bill in Jaipur: क्या है UGC एक्ट?
UGC एक्ट यानी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 भारत में उच्च शिक्षा को नियंत्रित करने वाला कानून है। इसके तहत विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की स्थापना की गई, जिसका उद्देश्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखना है। UGC का काम उच्च शिक्षा के मानक तय करना, पाठ्यक्रमों की निगरानी करना, शिक्षकों की योग्यता निर्धारित करना और योग्य संस्थानों को वित्तीय सहायता देना है। यह एक्ट यह सुनिश्चित करता है कि देशभर में विश्वविद्यालयों की शिक्षा प्रणाली एक समान, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण बनी रहे तथा छात्रों को मान्यता प्राप्त डिग्री मिले।
UGC एक्ट पर क्यों हुआ बवाल?
UGC एक्ट पर बवाल इसलिए हुआ क्योंकि हाल के नए UGC नियमों/संशोधनों को लेकर यह आरोप लगाए गए कि इससे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता कमजोर होगी। कई शिक्षक संगठनों, छात्र संगठनों और राज्य सरकारों का कहना है कि केंद्र सरकार को इससे ज्यादा अधिकार मिल जाएंगे और राज्यों की भूमिका घटेगी।
विरोध करने वालों को डर है कि नियुक्तियों, पाठ्यक्रम और प्रशासन में राजनीतिक दखल बढ़ सकता है। कुछ लोगों ने इसे 1919 के रॉलेट एक्ट जैसा बताते हुए कहा कि यह बिना व्यापक सहमति के थोपा जा रहा है। इसी वजह से देशभर में प्रदर्शन हुए, बंद का ऐलान हुआ और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां कोर्ट ने फिलहाल नए नियमों पर रोक लगा दी।
UGC एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाया स्टे?
UGC एक्ट से जुड़े नए नियमों (रेगुलेशंस) पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल स्टे लगाया है। कोर्ट ने साफ कहा कि जब तक मामले की पूरी सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक नए UGC नियम लागू नहीं होंगे और पुराने नियम ही प्रभावी रहेंगे।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला इसलिए आया क्योंकि याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि नए नियमों से विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता प्रभावित होगी और केंद्र को जरूरत से ज्यादा अधिकार मिलेंगे। कोर्ट ने केंद्र सरकार और UGC से जवाब भी मांगा है और अगली सुनवाई की तारीख तय की गई है।
1919 का रॉलेट एक्ट क्या था?
1919 का रॉलेट अधिनियम भारत में ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार द्वारा पारित एक दमनकारी कानून था, जिसने सरकार को बिना मुकदमे के लोगों को गिरफ्तार करने और हिरासत में लेने की व्यापक शक्तियां प्रदान कीं।
यह भी पढ़ें: UGC के वो 4 नियम? जिनको लेकर टीचर्स-स्टूडेंट्स और सियासी गलियों तक मचा है बवाल, समझें विस्तार से पूरा विवाद




























