Delhi-UP-Bihar से लेकर बंगाल तक बसंत पंचमी का जश्न, जानें भारत के अलग-अलग राज्यों में कैसे मनाया जाता है ये उत्सव

Saraswati Puja Celebration 2026

Saraswati Puja Celebration 2026: बसंत पंचमी का पर्व भारत के रमुख त्योहारों में से एक है। यह त्योहार सिर्फ पूजा-पाठ तक ही सीमित नहीं है, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी, खेती, मौसम और संस्कृति से भी जुड़ा है। बसंत पंचमी पर्व, सर्दियों की विदाई और वसंत के आगमन का संदेश देता है। इस दिन को ज्ञान, कला, संगीत और शिक्षा की देवी सरस्वती की पूजा के तौर पर भी मनाया जाता है।

इस दिन चारों तरफ पीला रंग, खिलते फूल, लहलहाते सरसों के खेत और खुशियों का माहौल नजर आता है। देशभर के कई राज्यों में ये पर्व बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है, लेकिन कुछ राज्यों में इसकी पहचान और रौनक बाकि जगहों से अलग होती है। आइए जानते हैं, देशभर के अलग-अलग राज्यों में इस त्योहार को किस तरह मनाते हैं।

Basant Panchami in Different States: देशभर में किस तरह मानते हैं इस पर्व का जश्न

Punjab के लिए खास है बसंत पंचमी का पर्व

Saraswati Puja Celebration 2026
Punjab (Image- Social Media)

बसंत पंचमी भारत के कई राज्यों में मनाई जाती है, लेकिन इसका सबसे बड़ा केंद्र पंजाब माना जाता है। पंजाब में इस पर्व का महत्व सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि खेती, मौसम और लोक संस्कृति से भी जुड़ा है। पंजाब एक कृषि प्रधान राज्य हैं और यहां मौसम का बदलाव सीधे लोगों की जिंदगी पर असर डालता है। बसंत पंचमी से ठंड कम होने लगती है और खेतों में सरसों लहराती है। इस दिन पंजाब में लोक गीतों की गूंज सुनाई देती है और आसमना में रंग-बिरंगी पतंगे उड़ती है। इस दिन लोग पिले कपड़े पहनते हैं, घरों की छतों पर जमा होते हैं और ढोल की ठप से माहौल रंगीन बनाते हैं।

Uttar Pradesh में बसंत पंचमी का आध्यात्मिक अनुभव

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में वसंत पंचमी का अनुभव बेहद ही आध्यात्मिक होता है। गंगा के घाट इस दिन दीयों की रौशनी से जगमगा उठते हैं, और पूरे शहर में मंदिरों, स्कूलों और घरों में सरस्वती पूजा का आयोजन होता है। सुबह की नाव यात्रा के दौरान मंत्रों और प्रार्थनाओं की गूंज सुनना एक अद्भुत अनुभव होता है। काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन इस दिन की भव्यता को और बढ़ा देते हैं।

Bihar में बसंत पंचमी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

Saraswati Puja Celebration 2026
Bihar (Image- Social Media)

बिहार में बसंत पंचमी का त्योहार खास धार्मिक और सांस्कृतिक अंदाज में मनाया जाता है। इस दिन स्कूल, कॉलेज और घरों में विधिपूर्वक मां सरस्वती की पूजा होती है। बच्चों और विद्यार्थियों के लिए यह दिन खास माना जाता है। कई जगहों पर इस दिन “विद्याभ्यासी” और छात्रों द्वारा पुस्तकों और पेन का पूजन किया जाता है। लोग पीले कपड़े पहनते हैं, क्योंकि पीला रंग सरसों के खेत और बसंत ऋतु का प्रतीक है। इस दिन खास पकवान जैसे हलवा, खीर और मिठाई बनाई जाती हैं। कई शहरों और गांवों में बसंत पंचमी के अवसर पर मेले और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।

West Bengal में ऐसे मनाते हैं बसंत पंचमी

पश्चिम बंगाल में बसंत पंचमी को ‘श्रीपंचमी’ नाम से भी जानते हैं। इस दिन विशेष रूप से काव्य, संगीत और कला के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है। इस दिन लोग पिले कपड़े पहनते हैं और विभिन्न रंग-बिरंगे फूलों से घर को सजाते हैं। इस पर्व पर देवी सरस्वती की पूजा के बाद लोग पारंपरिक रूप से ‘पहल काव्य’ करते हैं। इसके अलावा, बंगाल में इस दिन को बसंती उत्सव के रूप में मनाया जाता है।

Delhi में हजरत निजामुद्दीन पर बसंत पंचमी का पर्व

Saraswati Puja Celebration 2026
Delhi (Image- Social Media)

देश की राजधानी दिल्ली में भी बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाता है। राजधानी दिल्ली में हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह पर बसंत पंचमी का पर्व हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग हर्षों उल्लास के साथ मनाते हैं। इस दिन दोनों समुदाय के लोग पीले फूलों की होली खेलकर माहौल को गंगा-जमुनी तहजीब का उदाहरण पेश करते हैं। इस दिन हजरत निजामुद्दीन औलिया और अमीर खुसरो की मजार पर पीले रंग की चादर चढ़ाई जाती है और दरगाह को पीले रंग के फूलों से सजाया जाता है।

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