SC Bars 3 Experts over NCERT Controversy : एनसीईआरटी (NCERT) की किताबों में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के चैप्टर के विवाद मे एक चरण और आगे बढ़ गया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है. चीफ जस्टिस की बेंच ने इस मामले में न केवल नाराजगी जताई है, बल्कि इस अध्याय को तैयार करने वाले 3 मुख्य लोगों को तत्काल प्रभाव से सभी सरकारी प्रोजेक्ट्स और सार्वजनिक धन से जुड़ी जिम्मेदारियों से अलग करने का ऐतिहासिक आदेश दिया है.
सुप्रीम कोर्ट ने विशेष रूप से जिन तीन लोगों को स्कूल पाठ्यक्रम तैयार करने की किसी भी प्रक्रिया से बाहर रखने का निर्देश दिया है, उनमें प्रोफेसर मिशेल डैनिनो, सुपर्णा दिवाकर और आलोक प्रसन्ना कुमार शामिल हैं.
बता दें मिशेल डैनिनो एक लेखक हैं जो वर्तमान में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के सामाजिक विज्ञान पाठ्यक्रम के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। वे आईआईटी गांधीनगर के मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग में अतिथि प्रोफेसर भी हैं। 2017 में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारतीय सरकार ने उन्हें देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म श्री से सम्मानित किया।
विवादित चैप्टर लिखने वालों पर ‘बैन’ के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और विश्वविद्यालयों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि जिन लोगों ने संबंधित विवादित चैप्टर को लिखा है, उन्हें भविष्य में पाठ्यक्रम तैयार करने के किसी भी कार्य से तुरंत अलग किया जाए. अदालत ने साफ किया है कि इन व्यक्तियों को ऐसी कोई भी जिम्मेदारी न दी जाए जिसमें सार्वजनिक धन का उपयोग शामिल हो.
अदालत ने टिप्पणी की कि इन व्यक्तियों को भारतीय न्यायपालिका के बारे में पर्याप्त ज्ञान नहीं है या उन्होंने जानबूझकर तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया, जिससे कक्षा 8 के छात्रों के सामने न्यायपालिका की नकारात्मक छवि पेश की गई।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया कि इन तीनों व्यक्तियों को तत्काल प्रभाव से किसी भी पाठ्यक्रम निर्माण या शैक्षणिक परियोजना से अलग किया जाए और उन्हें सार्वजनिक धन से जुड़े किसी भी प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी न दी जाए।
SC Bars 3 Experts over NCERT Controversy : अदालत में हुई तीखी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि एनसीईआरटी ने विवादित अध्याय प्रकाशित करने के लिए सार्वजनिक माफी जारी की है और पूरी किताब वापस ले ली गई है। हालांकि चीफ़ जस्टिस ने कहा कि हलफनामे से यह स्पष्ट होता है कि पाठ्यक्रम बेहद लापरवाही से तैयार किया गया था और यह भी पूछा कि अध्याय को किसके आदेश से दोबारा लिखा गया। जस्टिस बागची ने भी सवाल उठाया कि हलफनामे में सिर्फ यह कहा गया है कि अध्याय दोबारा लिखा गया है, लेकिन किसने लिखा और उसमें क्या बदलाव किए गए, इसका कोई विवरण नहीं दिया गया।
नए विशेषज्ञ समिति का गठन
अदालत ने आदेश दिया है कि यदि Chapter IV को दोबारा लिखा गया है, तो उसे तब तक प्रकाशित न किया जाए जब तक कि विशेषज्ञ समिति की मंजूरी न मिल जाए. इसके साथ ही, न्यायपालिका से जुड़े पाठ्यक्रम के लिए सरकार को एक सप्ताह के भीतर एक उच्च स्तरीय समिति बनाने का निर्देश दिया गया है, जिसमें एक वरिष्ठ रिटायर्ड जज, एक प्रमुख विद्वान और एक प्रसिद्ध वकील शामिल हों. कोर्ट ने NCERT को यह भी सुझाव दिया है कि वे समिति में किसी प्रमुख न्यायविद को शामिल करने पर विचार करें.
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