उज्जैन के नागचन्द्रेश्वर मंदिर में उमड़ी भक्तों की भीड़

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भोपाल /उज्जैन, 17 अगस्त (आईएएनएस) मध्य प्रदेश में नाग पंचमी का पर्व उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना का दौर जारी है। उज्जैन में नागचन्द्रेश्वर का ऐसा मंदिर है जो नाग पंचमी के मौके पर खुलता है और यहां देश भर के श्रद्धालु पूजा अर्चना करने पहुंच रहे हैं। सावन का सोमवार है और नाग पंचमी का पर्व है इस मौके पर शिवजी के साथ नाग देवता की भी आराधना करने में लोग जुड़े हुए हैं । तमाम देवालयों में सुबह से ही अनुष्ठानों का दौर जारी है और श्रद्धालु बम भोले के जय…

भोपाल /उज्जैन, 17 अगस्त (आईएएनएस) मध्य प्रदेश में नाग पंचमी का पर्व उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना का दौर जारी है। उज्जैन में नागचन्द्रेश्वर का ऐसा मंदिर है जो नाग पंचमी के मौके पर खुलता है और यहां देश भर के श्रद्धालु पूजा अर्चना करने पहुंच रहे हैं। सावन का सोमवार है और नाग पंचमी का पर्व है इस मौके पर शिवजी के साथ नाग देवता की भी आराधना करने में लोग जुड़े हुए हैं । तमाम देवालयों में सुबह से ही अनुष्ठानों का दौर जारी है और श्रद्धालु बम भोले के जय घोष के साथ पूजा अर्चना कर रहे हैं ।

उज्जैन में नागचंद्रेश्वर का एक ऐसा मंदिर है जो नाग पंचमी के मौके पर 24 घंटे के लिए श्रद्धालुओं के लिए खुलता है। रविवार की रात को 12 बजे विधि विधान के साथ पूजा अर्चना हुई और श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए कपाट खोल दिए गए। यह मंदिर 364 दिन बंद रहता है और सिर्फ नाग पंचमी के दिन खुलता है। मान्यता है कि नागराज तक्षक ने भगवान शिव से एकांत और निर्बाध साधना की इच्छा जताई थी। इसी कारण नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट वर्षभर बंद रखने की परंपरा चली आ रही है।

परंपरानुसार रविवार की रात को 12 बजे सबसे पहले श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से महंत विनीत गिरि महाराज ने मंदिर के द्वार खोले। इसके बाद नागचन्द्रेश्वर मंदिर की दुर्लभ प्रतिमा के पास पहुंचे, जहां भगवान का विशेष पूजन अर्चन कर त्रिकाल पूजा की शुरुआत की गई। नागचंद्रेश्वर का मंदिर महाकाल मंदिर की तीसरी खंड पर स्थित है ।यह प्रतिमा अपनी दुर्लभ कलात्मक शैली और धार्मिक महत्व के कारण श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है।

यहां विराजित प्रतिमा को करीब 11वीं शताब्दी यानी 1050 ईस्वी का माना जाता है। यहां शिवजी की अद्भुत प्रतिमा है जिसमें भगवान शिव और माता पार्वती सात फनों वाले नाग के छत्र के नीचे विराजमान हैं। शिव के गले और भुजाओं में नाग लिपटे हुए दिखाई देते हैं। साथ ही, भगवान गणेश, नंदी और सिंह की आकृतियां भी हैं। नागचन्द्रेश्वर मंदिर में दर्शन करने हजारों श्रद्धालु पहुंचे हैं, लंबी कतारे लगी हुई हैं। इस दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं ताकि श्रद्धालुओं को दर्शन में किसी तरह की असुविधा न हो।

–आईएएनएस

एसएनपी/पीएम

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IANS Agency

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