नई दिल्ली, 13 अगस्त (आईएएनएस)। वाईएसआरसीपी के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को नई दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात की और केंद्र से मांग की कि सीनियर इन-सर्विस शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से छूट दी जाए और इसके लिए जरूरी कदम उठाए जाएं, जिसमें ‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम’ में संशोधन भी शामिल है।
इस प्रतिनिधिमंडल में सांसद गोला बाबूराव, पीवी मिथुन रेड्डी, वाईएस अविनाश रेड्डी, मड्डिला गुरुमूर्ति, शिक्षक एमएलसी एमवी रामचंद्र रेड्डी, पर्वता रेड्डी, चंद्रशेखर रेड्डी और कल्पलता रेड्डी शामिल थे। उन्होंने केंद्र से सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले की समीक्षा करने का अनुरोध किया, जिसमें टीईटी योग्यता को अनिवार्य कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि जो शिक्षक 2011 से पहले सेवा में आए थे और 20 से 30 साल की सेवा पूरी कर चुके हैं, उन्हें 50 साल या उससे अधिक उम्र में टीईटी पास करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।
बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए वाईएसआरसीपी नेताओं ने कहा कि इससे आंध्र प्रदेश में लगभग एक लाख और पूरे देश में लाखों शिक्षक प्रभावित हुए हैं। उन्होंने सवाल किया कि राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में समीक्षा याचिका क्यों नहीं दायर की और एनडीए सरकार ने ‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम’ की धारा 23 में संशोधन क्यों नहीं किया।
उन्होंने कहा कि सीनियर शिक्षकों से सभी विषयों की ऑनलाइन परीक्षा देने के लिए कहना अनुचित है और यह उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। अगर परीक्षा जरूरी ही है तो इसे ऑफलाइन आयोजित किया जाना चाहिए और केवल उसी विषय की परीक्षा होनी चाहिए, जो शिक्षक पढ़ाते हैं।
नेताओं ने कहा कि शिक्षकों के पास योग्यता हासिल करने के लिए 31 अगस्त 2028 तक का समय है, लेकिन उन्हें नौकरी और प्रमोशन को लेकर बेवजह परेशान किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि राज्य विधानसभा छूट के लिए एक प्रस्ताव पारित करे। वाईएसआरसीपी ने कहा कि वह संसद में यह मुद्दा उठाएगी, जरूरत पड़ने पर ‘प्राइवेट मेंबर बिल’ पेश करेगी और इन-सर्विस शिक्षकों के लिए अपनी कानूनी और विधायी लड़ाई जारी रखेगी।
–आईएएनएस
एससीएच/डीकेपी
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