Nasir Kazmi Poetry: “तन्हाइयाँ तुम्हारा पता पूछती रहीं…” पढ़िए नासिर काज़मी के टॉप 9 शेर

Summary :

Nasir Kazmi Poetry: तन्हाइयाँ तुम्हारा पता पूछती रहीं, शब-भर तुम्हारी याद ने…

मुझे ये डर है तिरी आरज़ू न मिट जाए

बहुत दिनों से तबीअत मिरी उदास नहीं

आज देखा है तुझ को देर के बअ’द

आज का दिन गुज़र न जाए कहीं

ऐ दोस्त हम ने तर्क-ए-मोहब्बत के बावजूद

महसूस की है तेरी ज़रूरत कभी कभी

तेरी मजबूरियाँ दुरुस्त मगर

तू ने वादा किया था याद तो कर

जुदाइयों के ज़ख़्म दर्द-ए-ज़िंदगी ने भर दिए

तुझे भी नींद आ गई मुझे भी सब्र आ गया

नए कपड़े बदल कर जाऊँ कहाँ और बाल बनाऊँ किस के लिए

वो शख़्स तो शहर ही छोड़ गया मैं बाहर जाऊँ किस के लिए

इस क़दर रोया हूँ तेरी याद में

आईने आँखों के धुँदले हो गए

याद है अब तक तुझ से बिछड़ने की वो अँधेरी शाम मुझे

तू ख़ामोश खड़ा था लेकिन बातें करता था काजल

तन्हाइयाँ तुम्हारा पता पूछती रहीं

शब-भर तुम्हारी याद ने सोने नहीं दिया

Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।