Test3 कब है श्री विश्वकर्मा पूजा

Summary :

भगवान श्रीविश्वकर्माजी की ऋद्धि, सिद्धि और संज्ञा नाम की तीन पुत्रियों का वर्णन मिलता है। इनमें से ऋद्धि और सिद्धि का विवाह श्रीगणेशजी महाराज से हुआ। मान्यता है कि ऋद्धि और सिद्धि के बिना श्रीगणेशजी की पूजा अधूरी मानी जाती है। तीसरी पुत्री श्रीसंज्ञा का विवाह महर्षि कश्यप और देवी अदिति के पुत्र भगवान सूर्य से हुआ था। उपरोक्त तथ्यों से यह बात स्वतः ही सिद्ध हो जाती है कि भगवान श्रीविश्वकर्माजी आदिदेव हैं। यदि ऋग्वेद की बात की जाए तो विश्वकर्मा सूक्त के नाम से 11 ऋचाएं मिलती हैं। ऋग्वेद में विश्वकर्मा शब्द इन्द्र और सूर्य का विशेषण बनकर…

ff0c2605bd1ef42324e74d9c15599fad

भगवान श्रीविश्वकर्माजी की ऋद्धि, सिद्धि और संज्ञा नाम की तीन पुत्रियों का वर्णन मिलता है। इनमें से ऋद्धि और सिद्धि का विवाह श्रीगणेशजी महाराज से हुआ। मान्यता है कि ऋद्धि और सिद्धि के बिना श्रीगणेशजी की पूजा अधूरी मानी जाती है। तीसरी पुत्री श्रीसंज्ञा का विवाह महर्षि कश्यप और देवी अदिति के पुत्र भगवान सूर्य से हुआ था। उपरोक्त तथ्यों से यह बात स्वतः ही सिद्ध हो जाती है कि भगवान श्रीविश्वकर्माजी आदिदेव हैं। यदि ऋग्वेद की बात की जाए तो विश्वकर्मा सूक्त के नाम से 11 ऋचाएं मिलती हैं। ऋग्वेद में विश्वकर्मा शब्द इन्द्र और सूर्य का विशेषण बनकर भी प्रयुक्त हुआ है। यजुर्वेद के अध्याय 17 में भी भगवान श्रीविश्वकर्माजी का वर्णन आता है।035A6304

shalu sengar