छत्तीसगढ़ राज्य मंत्रिमंडल ने औद्योगिक नीति 2019-24 में संशोधन को मंजूरी दे दी है। इसके तहत इकाइयों को प्रोत्साहन देने के कई उपाय किये गये हैं तथा अनुसूचित जाति / जनजाति श्रेणी के उद्यमियों और स्टार्टअप के लिये एक विशेष पैकेज की घोषणा की गयी है। एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी।
आपको बता दें कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में ये निर्णय लिये गये। अधिकारी ने कहा कि संशोधित औद्योगिक नीति के तहत, मंत्रिमंडल ने स्टील (स्पॉज-आयरन और स्टील) क्षेत्र में मेगा और अल्ट्रा-मेगा परियोजनाओं में निवेश के लिये एक विशेष प्रोत्साहन पैकेज को मंजूरी दी गई है।
उन्होंने कहा कि ऐसी परियोजनाओं में निवेशकों को अधिकतम 500 करोड़ रुपये (बस्तर संभाग के लिये एक हजार करोड़ रुपये) प्रोत्साहन के रूप में मिलेंगे। इन प्रोत्साहनों का लाभ उठाने के लिये इकाइयों को 31 अक्टूबर 2024 तक वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करना होगा। अधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री बुनियादी संरचना रख रखाव एवं उन्नयन प्राधिकण के गठन के लिये एक मसौदे को भी मंजूरी दी गयी है। प्राधिकरण शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क यातायात से संबंधित बुनियादी सुविधाओं के रखरखाव तथा उन्नयन के लिये धन उपलब्ध करायेगा।
उन्होंने कहा कि नया निकाय संबंधित विभागों और जिला प्रशासन के सलाहकार के रूप में भी काम करेगा। मुख्यमंत्री इस प्राधिकरण के अध्यक्ष होंगे, जबकि सभी कैबिनेट मंत्री, मुख्य सचिव, वित्त और सामान्य प्रशासन विभागों के सचिव इसके सदस्य होंगे। अधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव / सचिव नये निकाय के सदस्य सचिव होंगे। एक अन्य फैसले में, मंत्रिमंडल ने छत्तीसगढ़ सरकार के कार्य (आवंटन) नियम में संशोधन करके वन विभाग का नाम बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। अधिकारी ने कहा कि इसे अब वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के नाम से जाना जायेगा।


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