ऊना दलित हिंसा मामले में 10 साल सुनवाई और 260 से ज्यादा लोगों के बयान दर्ज होने के बाद आया फैसला, 37 आरोपी बरी, 5 को 5-5 साल की सजा

Court Decision on Dalit Flogging Case 2016

Court Decision on Dalit Flogging Case 2016 : गुजरात के ऊना के मोटा समढियाला गांव में साल 2016 में हुई चर्चित घटना में सोमनाथ जिले के वेरावल स्थित स्पेशल कोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद फैसला सुना दिया है। करीब एक दशक बाद आए इस निर्णय में 42 में से 37 आरोपियों को बरी कर दिया गया, जबकि 5 लोगों को दोषी करार देते हुए 5-5 साल की सजा सुनाई गई है।

अदालत ने इस मामले में शामिल कुछ पुलिसकर्मियों को भी बरी कर दिया है। इनमें कंचनबेन, पीएसआई पांडे, ऊना पीएसओ करशनभाई और निर्मल झाला शामिल हैं। बताया गया है कि आरोपियों में से दो लोगों की पहले ही मौत हो चुकी है, जिनमें निर्मल झाला भी शामिल हैं।

Una Flogging Case: देशभर में चर्चा में रहा था ऊना कांड

Una Flogging Case
Una Flogging Case (Source: Social Media)

बता दें, 2016 में घटी इस घटना का प्रभाव पूरे देश पर हुआ था, और इस घटना के बाद देश के अलग अलग इलाकों में प्रदर्शन शुरू हो गए थे। यह मामला केवल एक स्थानीय घटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने देशभर में जाति, सामाजिक न्याय और कानून व्यवस्था को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी थी। इस घटना के बाद दलित उत्पीड़न का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया था।

Una Flogging Case 2016: क्या हुआ था 2016 में

11 जुलाई 2016 को मोटा समढियाला गांव में दलित समुदाय के चार युवकों के साथ सार्वजनिक रूप से मारपीट की गई थी। आरोप था कि वे गोहत्या में शामिल थे। हालांकि पीड़ितों का कहना था कि वे मृत पशुओं की खाल उतारने का काम करते थे। इसके बावजूद उन्हें कथित तौर पर ‘गौरक्षकों’ द्वारा कपड़े उतार कर लाठियों और बेल्ट से पीटा गया।

जब इन्हे पीटा जा रहा था तो इसकी फ़ोटो देश भर में फैल गई थी जिसमें दलित युवाओं को पोल पर बांध कर पीटा गया था।

घटना का वीडियो सामने आने के बाद यह मामला तेजी से फैल गया और देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। गुजरात समेत कई राज्यों में दलित समुदाय के समर्थन में आंदोलन हुए और कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठे। यहां तक कि दिल्ली में भी खूब विरोध हुआ।

Una Case Judgment 2026: लंबी सुनवाई के बाद आया फैसला

Una Case Judgment 2026
Una Case Judgment 2026 (Source: Social Media)

इस मामले में शुरुआत में 42 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था, जिसमें हत्या के प्रयास, डकैती, अपहरण, दंगा और आपराधिक साजिश जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई थीं। करीब 10 साल चली सुनवाई के दौरान 260 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अदालत ने 16 मार्च को 37 आरोपियों को बरी किया था, जबकि 5 को दोषी ठहराया गया। अब 17 मार्च को इन दोषियों को सजा सुनाई गई है।

Court Decision on Dalit Flogging Case 2016: कई गंभीर धाराओं में नहीं ठहराए गए दोषी

कोर्ट ने अपने फैसले में हत्या के प्रयास, डकैती, अपहरण, दंगा और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोपों में आरोपियों को दोषी नहीं माना। हालांकि अन्य धाराओं में दोष सिद्ध होने पर 5 आरोपियों को सजा दी गई है।

यह भी पढ़ें5% DA बढ़ोतरी का ऐलान! इस राज्य के कर्मचारियों में खुशी की लहर, जानें कब से मिलेगा फायदा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


Make Punjab Kesari Your Trusted News Source

पंजाब केसरी एक हिंदी भाषा का समाचार पत्र है जो भारत में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली के कई केंद्रों से प्रकाशित होता है।