छत्तीसगढ़: महिला पुलिसकर्मी को धमकी देने के आरोप में BJP नेता और आरटीआई कार्यकर्ता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज

Summary :

रायपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आरिफ शेख के अनुसार पुलिस अधिकारी ने अपनी शिकायत में कहा कि पुलिस ने रितेश ठाकुर नामक एक मुजरिम को चेक बाउंस होने के मामले में गिरफ्तार किया था।

छत्तीसगढ़ पुलिस ने रायपुर में एक महिला पुलिस अधिकारी को धमकी देने के आरोप में रविवार को प्रदेश के भाजपा नेता गौरीशंकर श्रीनिवास के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस के अधिकारी ने बताया कि डीडी नगर पुलिस थाने की अधिकारी मंजूलता राठौर ने शनिवार को कबीर संचार शोधपीठ के अध्यक्ष कुणाल शुक्ला और बीजेपी नेता गौरीशंकर श्रीवास के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।
रायपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आरिफ शेख के अनुसार पुलिस अधिकारी ने अपनी शिकायत में कहा कि पुलिस ने  रितेश ठाकुर नामक एक मुजरिम को चेक बाउंस होने के मामले में गिरफ्तार किया था। शुक्ला और श्रीवास छह फरवरी की रात को पुलिस स्टेशन उसी मुजरिम को छुड़ाने आए थे। जब पुलिस ने उन्हें आरोपी को छोड़ने से मना कर दिया तब वे पुलिस अधिकारी पर दवाब डालने लगे और उन्हें धमकी देने लगे। शिकायत में महिला पुलिस अधिकारी ने कहा कि जब उन्होंने दोनों से कहा कि ठाकुर को अदालत के आदेश पर गिरफ्तार किया गया है।
इसके बाद शुक्ला और श्रीवास ने पुलिस अधिकारी के चैम्बर में जाकर उन्हें धमकी दी कि अगर उन्होंने ठाकुर को नहीं छोड़ा तो उन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा और उनकी छवि खराब कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि शनिवार को राठौर के पुलिस शिकायत दायर करने के बाद शुक्ला और श्रीवास के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि मामले में अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है और मामले में आगे की जांच जारी है।

नई दिल्ली के कांग्रेस उम्मीदवार रोमेश सभरवाल प्रत्येक बूथ पर बिताएंगे रात

प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने पिछले महीने आरटीआई कार्यकर्ता शुक्ला को कबीर संचार शोधपीठ का अध्यक्ष नियुक्त किया था। इस बीच दोनों आरोपियों ने इन आरोपों से इनकार किया है और दावा किया कि दुर्भावना के कारण पुलिस उन्हें गलत आरोप में फंसा रही है। शुक्ला ने कहा, ‘‘ये आरोप निराधार हैं क्योंकि पुलिस थाने में ऐसा कुछ नहीं हुआ था। मैंने महिला पुलिस अधिकारी से सिर्फ अदालत का वारंट दिखाने को कहा था।’’
उन्होंने दावा किया, ‘‘पुलिस ने संभवत: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से नोटिस मिलने के बाद गुस्से में आकर यह गलत मामला दर्ज किया है। पिछले साल रायपुर में जब मैं शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहा था तब मेरे खिलाफ हुई बर्बर कार्रवाई को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने एसएसपी से जवाब मांगा था।’’ श्रीवास ने यह भी बताया कि प्रदेश कांग्रेस सरकार से कई मुद्दों पर सवाल करने के कारण पुलिस उन्हें लगातार निशाना बना रही है और हालिया प्राथमिकी इसी का नतीजा है।

Desk Team