केरल की हाई प्रोफाइल 5 हॉट सीट, जिस पर रहेगी सबकी नजर, क्या पिनाराई बचा पाएंगे लेफ्ट का अंतिम किला

Summary :

Kerala 5 Key Assembly Seats 2026 : 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव खत्म हो गए हैं। अब 4 मई को रिजल्ट घोषित होंगे, जिसकी गणना सुबह 8 बजे से शुरू हो जाएगी। सबसे दिलचस्प समीकरण इस बार केरल से देखने को मिल रहे हैं। केरल में मुकाबला कांटे का बना हुआ है। वैसे तो केरल में दो पार्टियां मुख्य रूप से चुनी जाती हैं मगर भाजपा के नेतृत्व में NDA हाल फिलहाल में राज्य में उभरी है। ऐसे में राज्य में मुकाबला कई सीटों पर त्रिकोणीय बनता दिख रहा है। हालांकि तमाम एग्जिट पोल में  केरल में हल्के मार्जिन से…

Kerala 5 Key Assembly Seats 2026 : 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव खत्म हो गए हैं। अब 4 मई को रिजल्ट घोषित होंगे, जिसकी गणना सुबह 8 बजे से शुरू हो जाएगी। सबसे दिलचस्प समीकरण इस बार केरल से देखने को मिल रहे हैं। केरल में मुकाबला कांटे का बना हुआ है। वैसे तो केरल में दो पार्टियां मुख्य रूप से चुनी जाती हैं मगर भाजपा के नेतृत्व में NDA हाल फिलहाल में राज्य में उभरी है।

ऐसे में राज्य में मुकाबला कई सीटों पर त्रिकोणीय बनता दिख रहा है। हालांकि तमाम एग्जिट पोल में  केरल में हल्के मार्जिन से यूडीएफ की जीत बता रहे हैं मगर राज्य में सत्ता संभाल रही एलडीएफ को कम करके नहीं आंका जा सकता।

हालांकि केरल में यह पारंपरिक या कहें कि रिवाज रहा है कि हर 5 साल बाद वहां लोग सत्ता जरूर बदलते हैं। और इस बार तो केरल की जनता ने एलडीएफ को दो बार मौका दिया है तो माना जा रहा है कि राज्य में सरकार बदलने जा रही है।

बता दें, केरल में 78.13 प्रतिशत वोट डाले गए। यह वोट प्रतिशत पिछली बार (2021) की तुलना में लगभग 4 प्रतिशत अधिक रहा है। यह प्रतिशत राज्य में हुए SIR के बाद सामने आया, जिसमें इस बार  2,71,42,952 मतदाताओं की संख्या था जो 2016 में 2,74,45,311 मत थे। यानि राज्य में 302359 मत SIR में छांटे गए। बता दें, राज्य में सबसे अधिक मतदान कोझिकोड में (80.22%) दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम कोट्टायम (74.35%) में दर्ज किया गया।

ऐसे में हम आपको वे 5 हॉट सीट्स बताने जा रहे  हैं, जहां सबकी नजर रहने वाली है-

Kerala 5 Key Assembly Seats 2026: पेरावूर विधानसभा क्षेत्र

(मौजूद संघर्ष )

INC – एडवोकेट सनी जोसेफ

CPM – के के शैलजा टीचर

यह सीट पहली बार 1977 में बनी थी। अधिकतर समय इस सीट पर यूडीएफ का उम्मीदवार जीतता रहा है। केरल के उत्तरी जिले कन्नूर में स्थित पेरावूर केरल विधानसभा की 16वीं सीट है. पेरावूर विधानसभा क्षेत्र केरल की हाई प्रोफ़ाइल सीटों में गिनी जा रही है। इस सीट से के के शेलेजा, जो कि एलडीएफ की उम्मीदवार हैं और जिन्होंने कोविड के समय राज्य में अपने कामों से तारीफ़ें पाई थीं लड़ रही हैं।

इस क्षेत्र की सामाजिक-आर्थिक संरचना छोटे कस्बों, कृषि आधारित आजीविका और नागरिक भागीदारी की मजबूत परंपरा से बनी है. यह इलाका ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों का मिश्रण है.

मतदाता संख्या की बात करें तो चुनाव आयोग की 2021 केरल विधानसभा चुनाव की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार पेरावूर में कुल 1,77,249 पंजीकृत मतदाता थे, जिनमें पुरुष, महिलाएं और थर्ड जेंडर के मतदाता शामिल थे. मतदान के दिन कुल 1,41,734 वैध वोट पड़े, जिससे मतदान प्रतिशत लगभग 80.41 प्रतिशत रहा. यह आंकड़ा बताता है कि यहां के लोग लोकतांत्रिक प्रक्रिया में काफी सक्रिय भागीदारी करते हैं.

CPI M वर्ष 2006 में, जीत दर्ज कर पाई थी, जब के. के. शैलजा टीचर यहां से विधायक बनी थीं. इसके अलावा लंबे समय तक कांग्रेस का दबदबा बना रहा. 1970 और 1980 के दशक में के. पी. नूरुद्दीन (कांग्रेस) कई बार विधायक रहे.. 2000 के दशक की शुरुआत में प्रो. ए. डी. मुस्तफा ने इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया. बाद में अधिवक्ता सनी जोसेफ 2011, 2016 और 2021 में लगातार तीन बार कांग्रेस की ओर से विधायक चुने गए.

2021 के विधानसभा चुनाव में पेरावूर में कांग्रेस और CPI(M) के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला.

  • कांग्रेस के सनी जोसेफ जीते – 64,784 (कुल मतों का 46.93 प्रतिशत) था.
  • CPI(M) के सक्कीर हुसैन हारे – (61,942 कुल मतों का 44.70 प्रतिशत).
  • भाजपा की स्मिता जयमोहन हारी – 9,155 (6.44 प्रतिशत मत)

Nemom Assembly Constituency: नेमोम विधानसभा क्षेत्र

(मौजूद संघर्ष )

BJP – राजीव चन्द्रशेखर

INC – के एस सबरीनाधन

CPM – वी शिवनकुट्टी

नेमोम के मतदाता बुनियादी सुविधाओं पर बहुत बारीकी से नजर रखते हैं. सड़कें, नालियां, पानी की सप्लाई, कचरा प्रबंधन और परिवहन जैसे मुद्दे यहां तुरंत राजनीतिक मुद्दे बन जाते हैं. इसके साथ ही, तिरुवनंतपुरम शहर की अन्य सीटों की तुलना में नेमोम में वैचारिक धार ज्यादा तीखी रही है।

नेमोम की सामाजिक संरचना कई परतों वाली है. यहां हिंदू आबादी बड़ी संख्या में है, साथ ही ईसाई और मुस्लिम समुदाय भी अलग-अलग वार्डों में फैले हुए हैं. हिंदू मतदाताओं के भीतर जातिगत समीकरण समय के साथ और अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं. हाल के सालों में नेमोम में भाजपा की लगातार बढ़त मुख्य रूप से उच्च जाति वर्गों के एकजुट होने से जुड़ी रही है.

1996 से 2001 के बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता ओ. राजगोपाल ने इस सीट से एलडीएफ और यूडीएफ दोनों को हराकर भाजपा को पहली बार केरल विधानसभा में प्रवेश दिलाया.

फिर 2016 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत ने इस धारणा को और मजबूत किया. भले ही 2021 में भाजपा यह सीट हार गई, लेकिन उसका वोट शेयर मजबूत बना रहा.

  • यहां से सीपीआई(एम) उम्मीदवार वी. शिवनकुट्टी ने जीता – 55,837 वोट (38.24 प्रतिशत वोट शेयर)
  • भाजपा उम्मीदवार कुम्मनम राजशेखरन को हराया – 51,888 वोट (35.54 प्रतिशत वोट शेयर) केवल 3,949 वोटों का अंतर.
  • कांग्रेस उम्मीदवार के. मुरलीधरन –  36,524 वोट मिले. यह भाजपा की सबसे मजबूत सीट मानी जाती है, जहां से उसके जीतने की प्रबल दावेदारी है.

Dharmadam Assembly Constituency: धर्मादम विधानसभा क्षेत्र

(मौजूद संघर्ष )

BJP – के रंजीत

INC -वी पी अब्दुल रशीद

CPM -पिनाराई विजयन

धर्मादम विधानसभा क्षेत्र केरल के कन्नूर जिले में स्थित है. यह राष्ट्रीय संसदीय चुनावों के लिए कन्नूर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। यह क्षेत्र वर्तमान में केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन द्वारा प्रतिनिधित्व किया जा रहा है.

सामाजिक रूप से यह क्षेत्र ग्रामीण कृषि समुदाय, नौकरीपेशा लोग, सेवा क्षेत्र से जुड़े कर्मचारी, छोटे व्यवसायी और तटीय मछुआरा समुदायों से मिलकर बना है. वर्ष 2008 में गठन के बाद से ही धर्मादम CPI M का मज़बूत गढ़ रहा है.

2021 विधानसभा चुनाव में धर्मादम में कुल 1,93,486 मतदाता पंजीकृत थे. इस चुनाव में लगभग 84 प्रतिशत मतदान हुआ, जो केरल की उच्च मतदान परंपरा को दर्शाता है. 2016 और 2021 में पिनराई विजयन ने जीत दर्ज की.

  • 2021 में पिनराई विजयन की जीत – 95,522 वोट (59.61%)
  • कांग्रेस के सी. रघुनाथन को – 45,399 वोट (28.33%)
  • भाजपा के सी. के. पद्मनाभन को – 14,623 वोट (9.13%)
  • पिनराई विजयन ने 50,123 वोटों की बड़ी जीत दर्ज की

Thrissur Assembly Seat: त्रिशूर विधानसभा सीट

(मौजूद संघर्ष )

पद्मजा वेणुगोपाल – BJP

राजन जे पल्लन – INC

अलंकोडे लीलाकृष्णन – CPI

मतदाता भागीदारी और मतदाता प्रोफाइल में देखा जाए तो 2021 के विधानसभा चुनाव में यहां लगभग 1,82,823 पंजीकृत मतदाता थे, जिनमें पुरुष और महिला मतदाताओं की संख्या लगभग बराबर रही. त्रिशूर में मतदान प्रतिशत आमतौर पर 70% से ऊपर रहा है। 2021 के चुनाव में यहां 70.69% मतदान हुआ.

राजनीतिक इतिहास और प्रतिनिधित्व के लिहाज से त्रिशूर हमेशा से मुकाबले वाली सीट रही है. यहां मुख्य रूप से वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF), जिसका नेतृत्व CPI(M) और उसके सहयोगी करते हैं, तथा संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF), जिसका नेतृत्व भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) करती है, इन दोनों के बीच सत्ता बदलती रही है. चुनाव दर चुनाव बीजेपी का वोट शेयर बढ़ता गया है. 2021 के केरल विधानसभा चुनाव परिणाम बेहद करीबी रहे. त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिला।

  • CPI के पी. बालचंद्रन – 44,263 वोट (34.25%)
  • कांग्रेस की पद्मजा वेणुगोपाल – 43,317 वोट (33.52%)
  • बीजेपी के मंत्री सुरेश गोपी – 40,457 वोट ( 31.30% )

मुख्य मुद्दे और स्थानीय समस्याएं आम तौर पर शहर की जरूरतों से जुड़ी हैं, जैसे शहरी सेवाएं और इंफ्रास्ट्रक्चर, नौकरी और आर्थिक अवसर, स्वास्थ्य और शिक्षा, सामुदायिक कल्याण और सार्वजनिक सुरक्षा, तथा सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन का संरक्षण.

Konni Assembly Constituency: कोन्नी विधानसभा क्षेत्र

( मौजूद संघर्ष )

INC – सतीश कोचुपराम्बिल

CPM –  के यू जेनिश कुमार

कोन्नी एक ऐसा विधानसभा क्षेत्र है जहां की राजनीति जंगल, जंगली जानवरों और सरकार की मौजूदगी से गहराई से जुड़ी हुई है. यहां के लोग रोजमर्रा के खतरों के साथ जीवन जीते हैं, जैसे हाथियों का गांवों में घुस आना, फसलों का नष्ट होना और जंगलों के कारण सड़कों से कट जाना.

यह वही विधानसभा क्षत्रे है जहां भारत के प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों में से एक सबरीमला मंदिर है, फिर भी दिलचस्प बात यह है कि यहां की राजनीति लगातार धार्मिक ध्रुवीकरण की ओर नहीं गई. धर्म यहां के सामाजिक जीवन का हिस्सा जरूर है, लेकिन चुनावी फैसले ज्यादा तर सरकार के कामकाज, प्रशासन की सक्रियता और जमीनी समस्याओं के समाधान पर आधारित होते हैं, न कि सिर्फ धार्मिक भावनाओं के उभार पर.

यहां की आबादी में मध्य त्रावणकोर से आए हिंदू, एझावा समुदाय (जहां एसएनडीपी का प्रभाव है), और खेती, व्यापार व छोटे व्यवसाय से जुड़े ईसाई परिवार शामिल हैं. अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोग जंगल के किनारे और प्लांटेशन क्षेत्रों में रहते हैं, जो वन्यजीवों के खतरे और जमीन की अनिश्चितता से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं.

  • 2021 मे CPI M के जेनिश कुमार – 62,318 वोट
  • कांग्रेस के रॉबिन पीटर 53,810 वोट

यहां चुनाव जीतने के लिए जरूरी है कि नेता जंगली जानवरों से जुड़े मामलों में तुरंत कार्रवाई करे, मुआवजा दिलाने में तेजी दिखाए और प्रशासनिक दफ्तरों तक लोगों की पहुंच आसान बनाए. पेंशन, आवास, सड़क, स्वास्थ्य और आपदा राहत जैसी योजनाएं लोगों के राजनीतिक भरोसे को तय करती हैं.

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Rohit Singh

रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।