IAPSMCON2026: इंडियन एसोसिएशन ऑफ प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन (IAPSM) का 53वां वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन 27 फरवरी से 1 मार्च 2026 तक सिलवासा स्थित आधुनिक नामो मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट में आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में देशभर के सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और मेडिकल छात्रों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारत में जनस्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने, नई शोध उपलब्धियों को साझा करने और भविष्य की स्वास्थ्य रणनीतियों पर चर्चा करना था।
IAPSMCON2026: डॉ. मधु गुप्ता को मिला प्रतिष्ठित धनवंतरी भाषण सम्मान

सम्मेलन के दौरान पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के सामुदायिक चिकित्सा विभाग एवं स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की प्रोफेसर डॉ. मधु गुप्ता को प्रतिष्ठित धनवंतरी भाषण देने का सम्मान प्रदान किया गया। उन्हें यह सम्मान दमन एवं दीव तथा दादरा एवं नगर हवेली एवं लक्षद्वीप के प्रशासक श्री प्रफुल पटेल द्वारा दिया गया। उनका व्याख्यान “विकसित भारत 2047 की ओर अग्रसर: विकास से प्रभावशीलता तक टीकों का योगदान” विषय पर केंद्रित रहा।
विकसित भारत के लिए टीकाकरण की अहम भूमिका
अपने संबोधन में डॉ. गुप्ता ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में टीकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने बताया कि टीकाकरण केवल बीमारियों से बचाव का साधन नहीं है, बल्कि यह आर्थिक प्रगति, गरीबी कम करने और समाज में समानता लाने का प्रभावी माध्यम भी है। उनके अनुसार, स्वस्थ नागरिक ही मजबूत राष्ट्र की नींव होते हैं और इसमें टीकाकरण की बड़ी भूमिका है।
सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम की उपलब्धियां
डॉ. गुप्ता ने भारत के सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 1978 में जहां केवल चार टीके शामिल थे, वहीं 2026 तक इनकी संख्या बढ़कर बारह हो गई है। भारत ने चेचक, पोलियो और नवजात टेटनस जैसी गंभीर बीमारियों को खत्म करने में सफलता हासिल की है। उन्होंने यह भी बताया कि डीपीटी3 टीकाकरण कवरेज वर्ष 2000 में 58 प्रतिशत था, जो 2024 तक बढ़कर 94 प्रतिशत हो गया। लगातार टीकाकरण अभियानों के कारण नवजात, शिशु और पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में भी उल्लेखनीय कमी आई है।
कोविड-19 टीकाकरण अभियान बना ऐतिहासिक उदाहरण
डॉ. गुप्ता ने भारत के कोविड-19 टीकाकरण अभियान को सार्वजनिक स्वास्थ्य के इतिहास का एक महत्वपूर्ण मोड़ बताया। उन्होंने स्वदेशी टीकों के तेजी से विकास, बड़े स्तर पर वितरण और “वैक्सीन मैत्री” पहल के माध्यम से अन्य देशों की सहायता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि CoWIN और U-WIN जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म ने टीकाकरण प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रभावी बनाया, जिससे लाभार्थियों की निगरानी और डेटा प्रबंधन आसान हुआ।
पीजीआईएमईआर का शोध और नीति निर्माण में योगदान
अपने व्याख्यान में उन्होंने पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के योगदान को भी रेखांकित किया। संस्थान ने टीकों के परीक्षण, सुरक्षा निगरानी, लागत-प्रभावशीलता अध्ययन और राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। रोटावायरस, टाइफाइड, खसरा-रूबेला, एचपीवी टीकाकरण और वयस्क टीकाकरण दिशानिर्देशों पर किए गए शोधों ने देश की स्वास्थ्य नीति को मजबूत किया है।
भविष्य के लिए जीवन-चक्र आधारित टीकाकरण की जरूरत
भाषण के अंत में डॉ. गुप्ता ने जीवन-चक्र आधारित टीकाकरण मॉडल अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल बच्चों ही नहीं, बल्कि वयस्कों और बुजुर्गों के लिए भी मजबूत टीकाकरण कार्यक्रम जरूरी हैं। साथ ही, टीका विकास और निगरानी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग को बढ़ाने की भी आवश्यकता है। उन्होंने अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा कि “टीके सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय मजबूती का आधार हैं। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए टीकाकरण में निरंतर निवेश और जागरूकता बेहद जरूरी है।”
यह भी पढ़ें: जंतर मंतर रैली को CM भगवंत मान ने वर्चुअली किया संबोधित, कहा, ‘मोदी सरकार पंजाब विरोधी’




















