राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार को कहा कि महिलाओं पर अत्याचार एवं उत्पीड़न किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और राजस्थान सरकार ने ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। गहलोत रवीन्द्र मंच सभागार में भारतीय महिला फेडरेशन के 21वें राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जघन्य अपराधों के त्वरित अनुसंधान के लिए एक विशेष यूनिट बना रही है जो जल्द से जल्द तफ्तीश करके पीड़ित को शीघ्र न्याय दिलाना सुनिश्चित करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने महिलाओं के खिलाफ अत्याचार एवं उनके उत्पीड़न की घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए हैं और आगे भी इसमें किसी तरह की कमी नहीं रखी जाएगी।
उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने मॉब लिंचिंग (भीड़ द्वारा पीटकर मार डालना) व आनर किलिंग (झूठी शान के लिए हत्या) के खिलाफ सख्त कानून बनाए जिन पर केन्द्र से मंजूरी का इंतजार है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिला सशक्तीकरण के लिए प्रतिबद्ध है। लोकसभा व राज्य विधानसभाओं में एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का संकल्प राज्य विधानसभा में पारित किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के स्वावलम्बन और सशक्तीकरण से ही समाज विकसित बनता है। ऐसे में जरूरी है कि महिलाएं घूंघट छोडे़ं और पुरुष आगे बढ़कर इस प्रथा को समाप्त करने में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने महिला सशक्तीकरण की मिसाल पेश की। इसी प्रकार पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी की पहल पर हुए 73वें व 74वें संविधान संशोधन से महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलना सुनिश्चित हुआ।
गहलोत ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की पैरवी करते हुए कहा कि असहमति का मतलब राष्ट्रद्रोह नहीं है। उन्होंने कहा कि देश को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों की आज और अधिक आवश्यकता है। संविधान की भावना के अनुरूप देश चलना चाहिए ताकि हर व्यक्ति को सामाजिक व आर्थिक न्याय मिल सके। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के जरिए आज युवा पीढ़ी को गुमराह किया जा रहा है जो स्वस्थ लोकतंत्र की दिशा में उचित नहीं है।
भारतीय महिला फेडरेशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष अरूणा रॉय ने कहा कि राजस्थान में सूचना के अधिकार को सशक्त करने के साथ ही महिला समानता और उन्हें अधिकार देने की दिशा में अच्छा काम हुआ है।


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