Garud Puran Death Rituals: सनातन धर्म में गरुड़ पुराण का बहुत महत्व है। इसमें न केवल हमारे वर्तमान जीवन बल्कि मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा, मनुष्य के अच्छे-बुरे कर्मों और उनके मिलने वाले परिणामों के बारे में बहुत गहराई से समझाया गया है। हिंदू धर्म में व्यक्ति की मृत्यु के बाद कई धार्मिक क्रियाएं की जाती हैं, जिनमें तेरहवीं, पिंडदान और तर्पण बहुत मुख्य हैं। लेकिन मन में सवाल आता है कि मौत के 13वें दिन ही तेरहवीं क्यों करते हैं? पिंडदान करने से मृत आत्मा को क्या लाभ मिलता है और इसका यमलोक की यात्रा से क्या लेना-देना है?
तेरहवीं क्यों जरूरी मानी जाती है? (Tehravin Ka Mahatva)
गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद के शुरुआती दिन आत्मा की आगे की यात्रा से जुड़े होते हैं। 13वें दिन की जाने वाली रस्मों का उद्देश्य मृत व्यक्ति को सम्मान देना और उसकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करना है। इस दिन पिंडदान, जल चढ़ाना, ब्राह्मणों को भोजन कराना और दान-पुण्य जैसे काम किए जाते हैं। ये काम परिवार का धर्म माने जाते हैं, जिससे आत्मा का आगे का रास्ता आसान हो जाता है।
तेरहवीं न करने पर आत्मा का क्या होता है? (Garud Puran 13th Day Ritual)

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अगर मृत्यु के बाद ये जरूरी रस्में न की जाएं तो आत्मा को संतुष्टि नहीं मिलती। ऐसे में माना जाता है कि आत्मा प्रेत बनकर भटकती रहती है। अपने घर-परिवार से लगाव के कारण आत्मा कुछ समय तक अपने परिवार के आसपास ही घूमती रहती है।



Download Android App
Download iOS App



