3 Challenges For India Against Srilanka: श्रीलंका के खिलाफ अपकमिंग टेस्ट सीरीज से पहले टीम इंडिया ने अपनी तैयारियों को मजबूत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। इंडियन टीम ने श्रीलंका क्रिकेट XI के खिलाफ तीन दिन प्रैक्टिस मैच खेला और इसे 6 विकेट से अपने नाम किया। हालांकि, जीत के बावजूद मुकाबले में टीम की कुछ कमजोरियां सामने आईं, जिन पर टेस्ट सीरीज शुरू होने से पहले टीम मैनेजमेंट को काम करना होगा। भारत और श्रीलंका के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज 15 अगस्त से गॉल में शुरू होगी। भारतीय टीम को सीरीज जीतने का प्रबल दावेदार माना जा रहा है, लेकिन फिर भी टीम के सामने कुछ अहम चैलेंजेस होंगे।
1. गेंदबाजी संयोजन तय करना बड़ी चुनौती

जसप्रीत बुमराह और वॉशिंगटन सुंदर की गैरमौजूदगी से भारत का गेंदबाजी अटैक थोड़ा कमजोर हुआ है। मोहम्मद सिराज, कुलदीप यादव और रवींद्र जडेजा के पास काफी इंटरनेशनल एक्सपीरिएंस है, लेकिन बाकी गेंदबाजों के पास टेस्ट क्रिकेट का एक्सपीरिएंस लिमीटेड है।
अगर बात करें औकिब नबी, गुरनूर बरार, प्रसिद्ध कृष्णा, मानव सुथार और सारांश जैन की तो इन्होंने मिलकर अभी तक सिर्फ 8 टेस्ट मैच खेले हैं। जिनमें से तीन खिलाड़ियों का अभी टेस्ट डेब्यू करना बाकी है, ऐसे में गॉल की स्पिन मददगार सिचुएसन्स को देखते हुए टीम मैनेजमेंट को तय करना होगा कि प्लेइंग इलेवन में एडिशनल स्पिनर को जगह दी जाए या तेज गेंदबाजी को मजबूत किया जाए।
2. मिडिल ऑर्डर को दिखाना होगा दम

श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में भारतीय मिडिल ऑर्डर का रोल बेहद अहम होगा। टेस्ट मैच आगे बढ़ने के साथ पुरानी गेंद और पिच पर बढ़ता स्पिन का असर बल्लेबाजों के लिए चुनौती पैदा कर सकता है। ऐसे में ऋषभ पंत और ध्रुव जुरेल से बड़ी पारियों की उम्मीद होगी। हालांकि, दोनों बल्लेबाज हाल के मुकाबलों में लगातार अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं और प्रैक्टिस मैच में भी उनका बल्ला ज्यादा नहीं चला है। पिछले वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप मुकाबलों में भी भारतीय मिडिल ऑर्डर की निरंतरता पर सवाल उठे हैं। अब ऐसे में टीम को उम्मीद होगी कि बल्लेबाज जिम्मेदारी संभालें और लोवर ऑर्डर के खिलाड़ियों पर निर्भरता कम करें।
3. टेस्ट क्रिकेट के लिए खुद को ढालना जरूरी

भारतीय टीम ने हाल के महीनों में काफी व्हाइट-बॉल क्रिकेट खेला है। ऐसे में टेस्ट क्रिकेट की लंबी और पेशेंस से भरी टेस्ट लेने वाली चुनौती के लिए खिलाड़ियों को दोबारा खुद को तैयार करना होगा। प्रैक्टिस मैच में भी भारतीय गेंदबाजों को श्रीलंका की सिचुएशन में मेहनत करनी पड़ी थी।
हालांकि टेस्ट क्रिकेट में सिर्फ तेज शुरुआत करना काफी नहीं होता, बल्कि बल्लेबाजों को लंबे समय तक विकेट पर टिकना और गेंदबाजों को लगातार दबाव बनाए रखना पड़ता है। गॉल में भारतीय टीम का असली टेस्ट उसके धैर्य, सही प्लानिंग और सिचुएशन के मुताबिक खुद को ढालने की एबिलिटी का होगा। अगर टीम इन तीनों चुनौतियों से पार पा लेती है, तो श्रीलंका के खिलाफ सीरीज में उसका पलड़ा भारी रह सकता है।



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