अब कैमरा भी ‘महसूस’ करेगा धुआं, आग लगते ही भेजेगा फोन और स्क्रीन पर अलर्ट

Summary :

International Police Expo 2026 : आग लगने के बाद शुरुआती कुछ मिनट किसी भी बड़े हादसे को रोकने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। अगर समय रहते इसकी जानकारी मिल जाए तो जान-माल के भारी नुकसान से बचा जा सकता है। इसी दिशा में भारत मंडपम में आयोजित इंटरनेशनल पुलिस एक्सपो 2026 में एक निजी कंपनी ने ऐसी अत्याधुनिक तकनीक पेश की है, जो सामान्य सीसीटीवी कैमरों को स्मार्ट फायर डिटेक्शन सिस्टम में बदल सकेगी। इस तकनीक के जरिए कैमरे धुआं या आग के शुरुआती संकेत मिलते ही तुरंत मोबाइल फोन और कंट्रोल रूम की स्क्रीन पर अलर्ट भेज देंगे।…

International Police Expo 2026 : आग लगने के बाद शुरुआती कुछ मिनट किसी भी बड़े हादसे को रोकने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। अगर समय रहते इसकी जानकारी मिल जाए तो जान-माल के भारी नुकसान से बचा जा सकता है। इसी दिशा में भारत मंडपम में आयोजित इंटरनेशनल पुलिस एक्सपो 2026 में एक निजी कंपनी ने ऐसी अत्याधुनिक तकनीक पेश की है, जो सामान्य सीसीटीवी कैमरों को स्मार्ट फायर डिटेक्शन सिस्टम में बदल सकेगी।

इस तकनीक के जरिए कैमरे धुआं या आग के शुरुआती संकेत मिलते ही तुरंत मोबाइल फोन और कंट्रोल रूम की स्क्रीन पर अलर्ट भेज देंगे। खास बात यह है कि इसके लिए नए कैमरे लगाने की जरूरत नहीं होगी। यह सिस्टम घरों, फैक्ट्रियों, गोदामों, स्कूलों और अन्य संस्थानों में आग की घटनाओं का समय रहते पता लगाकर बड़े हादसों को रोकने में मददगार साबित हो सकता है।

कंपनी के प्रतिनिधि के अनुसार, इसके लिए उन्होंने एक खास चिप और मोबाइल ऐप तैयार किया है, जिसे कैमरों से अटैच करके आग लगने के दौरान चंद सेकेंड में उसका पता चल जाएगा। इस सिस्टम को इस्तेमाल करने के लिए एक विशेष चिप को डीवीआर (डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर) के साथ जोड़ा जाता है।

इसके बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सॉफ्टवेयर कैमरों से मिलने वाली लाइव फुटेज का लगातार विश्लेषण करता है। जैसे ही किसी कैमरे की निगरानी में धुआं या आग जैसी गतिविधि दिखाई देती है। सिस्टम तुरंत उसे संभावित खतरे के रूप में पहचान लेता है और अधिकारियों, सुरक्षा कर्मियों, फैक्ट्री मालिकों और मकान मालिकों के मोबाइल पर तुरंत अलर्ट भेज देता है।

उन्होंने बताया कि यह तकनीक उन स्थानों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है, जहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहते हैं या जहां ज्वलनशील सामान रखा होता है। फैक्ट्रियां, गोदाम, स्कूल, अस्पताल, शॉपिंग मॉल, कार्यालय और आवासीय सोसायटियां इसके प्रमुख उपयोग क्षेत्रों में शामिल हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके लिए नए कैमरे लगाने की जरूरत नहीं पड़ती।

पहले से लगे सीसीटीवी कैमरों और डीवीआर के साथ भी इस सिस्टम को जोड़ा जा सकता है। उन्होंने बताया कि एआई आधारित वीडियो एनालिटिक्स आने वाले वर्षों में सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेंगे। इससे न केवल आग जैसी आपात स्थितियों पर तेजी से प्रतिक्रिया देना संभव होगा, बल्कि जान-माल के नुकसान को कम करने और बड़े हादसों को टालने में भी मदद मिलेगी।

सुरक्षा तकनीक को मिली नई उड़ान

एक्सपो में अत्याधुनिक सुरक्षा तकनीकों का प्रदर्शन किया गया। इसी दौरान एआई आधारित स्मार्ट फायर डिटेक्शन सिस्टम ने लोगों का खास ध्यान आकर्षित किया। यह तकनीक सामान्य सीसीटीवी कैमरों को स्मार्ट सुरक्षा उपकरण में बदलकर धुआं और आग के शुरुआती संकेतों की पहचान कर सकती है।

इसके अलावा एक्सपो में भारत की पहली स्वदेशी टाइटो स्नाइपर राइफल, वराह काउंटर-ड्रोन सिस्टम, एआई-पावर्ड एंटी-ड्रोन पेट्रोल वाहन, गरुड़ हाई-एल्टीट्यूड यूएवी, मॉड्यूलर बख्तरबंद वाहन और आधुनिक साइबर सुरक्षा प्लेटफॉर्म भी प्रदर्शित किए गए।

इसके अलावा ‘लैब ऑन व्हील्स’ जैसी मोबाइल फोरेंसिक लैब और एआई आधारित फोरेंसिक टूल्स ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। 25 से अधिक देशों की भागीदारी वाले इस आयोजन में विशेषज्ञों ने माना कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन और डिजिटल फोरेंसिक पर आधारित ये तकनीक भविष्य की पुलिसिंग, अपराध जांच और आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाएंगी।

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Avinay