सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स पर बढ़ रहे पाइरेटेड कंटेंट को लेकर केंद्र सरकार ने अब Telegram के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने प्लेटफॉर्म को नोटिस भेजकर 15 दिनों के भीतर (Telegram Piracy Notice) अपनी एंटी-पाइरेसी व्यवस्था मजबूत करने और इस दिशा में उठाए गए कदमों की पूरी रिपोर्ट देने को कहा है। सरकार का मानना है कि Telegram पर बड़ी मात्रा में फिल्मों, वेब सीरीज और दूसरे कॉपीराइट वाले कंटेंट की गैरकानूनी शेयरिंग हो रही है, जिससे फिल्म इंडस्ट्री और कंटेंट बनाने वालों को नुकसान पहुंच रहा है।
पाइरेटेड कंटेंट रोकने के लिए सरकार का निर्देश

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने Telegram को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वह अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद पाइरेटेड फिल्मों, वेब सीरीज, ऑडियो और वीडियो कंटेंट की पहचान करने के लिए मजबूत व्यवस्था तैयार करे। सरकार चाहती है कि ऐसे कंटेंट को जल्दी से जल्दी हटाया जाए और भविष्य में उनकी शेयरिंग को भी रोका जाए। केवल शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं माना जाएगा, बल्कि प्लेटफॉर्म को खुद भी ऐसे कंटेंट पर नजर रखनी होगी।
IT कानूनों का पालन जरूरी
सरकार ने याद दिलाया है कि भारत में काम करने वाले सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म को आईटी एक्ट 2000 और IT नियम 2021 का पालन करना जरूरी है। एक इंटरमीडियरी के रूप में Telegram की जिम्मेदारी है कि वह अपने प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए जरूरी सावधानी बरते। सरकार का कहना है कि इस कदम का मकसद फिल्म इंडस्ट्री, OTT प्लेटफॉर्म, ब्रॉडकास्टर्स, कंटेंट क्रिएटर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स के अधिकारों की रक्षा करना है।
अगर ऑनलाइन पाइरेसी पर समय रहते रोक नहीं लगाई गई, तो इससे Creative industries और देश की बढ़ती क्रिएटर इकोनॉमी को बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है। इसी कारण सरकार अब डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही तय करने की दिशा में लगातार सख्त कदम उठा रही है।
15 दिनों में देनी होगी पूरी रिपोर्ट

मंत्रालय ने Telegram को 15 दिनों के अंदर Action Taken Report (ATR) जमा करने के लिए कहा है। इस रिपोर्ट में कंपनी को बताना होगा कि उसने पाइरेटेड कंटेंट की पहचान करने, उसे हटाने और भविष्य में रोकने के लिए क्या-क्या कदम उठाए हैं। यदि तय समय के भीतर रिपोर्ट नहीं दी जाती या संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तो सरकार कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई कर सकती है।
शिकायत दर्ज करने की मांगी पूरी जानकारी
इसके साथ ही सरकार ने Telegram से उसके Grievance Redressal System यानी शिकायत निवारण व्यवस्था की पूरी जानकारी भी मांगी है। मंत्रालय जानना चाहता है कि फिल्म निर्माता, OTT प्लेटफॉर्म, ब्रॉडकास्टर और कानून लागू करने वाली एजेंसियां पाइरेसी की शिकायत कैसे दर्ज कर सकती हैं। साथ ही यह भी पूछा गया है कि शिकायत मिलने के बाद कितनी जल्दी कार्रवाई की जाती है और कंटेंट हटाने की प्रक्रिया क्या है।
सरकार ने Telegram को उन लोगों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाने का निर्देश दिया है जो लगातार पाइरेटेड कंटेंट शेयर करते हैं। इसमें केवल व्यक्तिगत अकाउंट ही नहीं, बल्कि चैनल, ग्रुप, बॉट, एडमिन और उनसे जुड़े नेटवर्क भी शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य ऐसे पूरे नेटवर्क पर रोक लगाना है जो फिल्मों और वेब सीरीज की अवैध कॉपी लोगों तक पहुंचाने का काम करते हैं।























