लखनऊ में ‘CM हेल्पलाइन’ कर्मचारियों का प्रदर्शन, पुलिस से तीखी झड़प, वायरल हुआ Video

CM Helpline1076  Employees Protest

CM Helpline 1076 Employees Protest: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सीएम हेल्पलाइन कर्मचारियों का जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला। काम और देर से सैलरी न मिलने को लेकर आक्रोशित सीएम हेल्पलाइन के 200 कर्मचारियों ने गुरुवार को सड़क पर उतरकर हल्ला बोला। कर्मचारियों ने साइबर टावर के बाहर प्रदर्शन करके, नारे लगते हुए मुख्यमंत्री दफ्तर की तरफ कूच करने लगे। तभी मौके मौजूद भारी पुलिस बल ने उन्हें संगीत नाटक अकादमी के पास रोक दिया।

पुलिस ने की प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश

सुबह करीब 9:30 बजे लोहिया पथ से शुरू हुआ यह मार्च तेजी से आगे बढ़ा, पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रास्ता रोकने की कोशिश की। लेकिन कर्मचारी तब भी नहीं रुके। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने बाद में बलपूर्वक हटाने की कार्रवाई शुरू की। वायरल वीडियो में भी आप देख सकते है कि पुलिस किस तरह महिला को ले जाते हुए नजर आ रही है। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का आरोप है कि हेल्पलाइन में उनका शोषण किया जा रहा है और उन्हें सिर्फ 7000 रुपये सैलरी दी जाती है, इससे उनमें भारी नाराजगी है।

CM Helpline 1076 Employees Protest: क्यों प्रदर्शन कर रहे कर्मचारी?

कर्मचारियों का आरोप है कि 15 हजार रुपए की सैलरी का वादा करके 7000-8000 रुपए दिए जा रहे हैं। इसके साथ ही दो महीने की सैलरी भी रोककर दी जा रही है। ऑफिस में जाते समय बाहर ही सबके फोन जमा कर लिए जाते हैं। घर में कोई भी इमरजेंसी होने पर उन्हें तुरंत जानकारी नहीं मिल पाती। इस दौरान करीब एक घंटे की बातचीत के बाद मामला शांत हुआ। अधिकारियों ने कर्मचारियों को समझाकर प्रदर्शन ख़त्म करवाया। वहीं 5 कर्मचारियों को मुख्यमंत्री से मिलने भी भेजा गया, तब जाकर प्रदर्शन समाप्त हुआ।

Uttar Pradesh News: क्या है सीएम हेल्पलाइन 1076?

सीएम हेल्पलाइन 1076 का संचालन, वी विन लिमिटेड कंपनी आउटसोर्सिंग करती है। सीएम हेल्पलाइन में यूपी के सभी 75 जिलों से लोग तहसील, जिला, पुलिस, बिजली, पानी, सरकारी अस्पताल, स्कूल, फसल बीमा, पेंशन, राशन कार्ड, मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास और सीएम आवास संबंधी शिकायतें दर्ज कराते हैं।

इसके बाद सिस्टम शिकायतों को एक निर्धारित प्रशासनिक ढांचे के तहत स्तर 1 से स्तर 4 तक संबंधित अधिकारियों-जैसे ब्लॉक, तहसील, जिला स्तर के अधिकारियों से लेकर डीएम, SSP और कमिश्नर तक भेजता है।

इसके तहत हर शिकायत को डिजिटल रूप से ट्रैक किया जाता है और तय समयसीमा के अंदर उसका निवारण किया जाता है। अगर समाधान नहीं होता या शिकायतकर्ता उससे संतुष्ट नहीं होता, तो उसे दोबारा उच्च स्तर पर भेज दिया जाता है।

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