FIR Against Avimukteshwaranand: ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके एक शिष्य के खिलाफ यौन शोषण के आरोपों में एफआईआर दर्ज की गई है। कोर्ट ने पुलिस को मामला दर्ज कर विधि अनुसार विवेचना करने का भी आदेश दिया है। कोर्ट के आदेश के बाद झूंसी थाने में दर्ज हुआ है और इसमें पॉक्सो एक्ट समेत गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।
FIR के अनुसार, यह मामला 13 जनवरी 2025 से 15 फरवरी 2026 के बीच का है। आरोप है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य ने दो शिष्यों, जिनमें से एक नाबालिग था, के साथ यौन शोषण किया।
Magh Mela 2026 Sexual Assault Case: कुंभ और माघ मेले में शोषण का आरोप
शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने बताया कि पीड़ित शिष्य उनके पास पहुंचे थे और आरोप लगाया कि वे लंबे समय से शोषण का शिकार हो रहे थे, लेकिन डर और दबाव के कारण वे पहले सामने नहीं आ सके।
FIR में यह भी कहा गया है कि 2025 के कुंभ मेला और 2026 के माघ मेला के दौरान लगे शिविरों में भी शोषण की घटनाएं हुईं। आरोप है कि ये घटनाएं शिविर के भीतर ही नहीं, बल्कि स्वामी के कैंप के बाहर खड़ी गाड़ी में भी हुईं।
Prayagraj Special POCSO Court Order: इन धाराओं में दर्ज हुआ केस

पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय सहिंता (BNS) की धारा 351(3) के अलावा POCSO एक्ट की कई गंभीर धाराओं- 51, 6, 3, 4(2), 16 और 17 के तहत केस दर्ज किया है। इसके साथ ही दो-तीन अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। यह FIR कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज की गई। फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
Swami Avimukteshwaranand Saraswati FIR: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का पक्ष

इस पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि उनके खिलाफ बच्चों के यौन शोषण मामले में जो एफआईआर दर्ज की गई है, वह झूठी है। उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया में पूर्ण विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि सच्चाई जांच के माध्यम से सामने आएगी।
स्वामी ने शिकायतकर्ता की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाया और दावा किया कि जिसने आरोप लगाए हैं, वह खुद आपराधिक पृष्ठभूमि वाला व्यक्ति है। उसका मुख्य काम लोगों के खिलाफ झूठे मामले दर्ज करके पैसे वसूलना है।
उन्होंने न्यायपालिका में विश्वास जताया और कहा, “हम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरह नहीं हैं। हम चाहते हैं कि हमारे खिलाफ मामले वापस लिए जाएं। हम बिना डर के बोलते रहेंगे और हमें विश्वास है कि सच्चाई विजयी होगी।”
‘यह शंकराचार्य परंपरा को बदनाम करने की साजिश…’
उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी ने भी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह शंकराचार्य परंपरा को बदनाम करने की साजिश है। उन्होंने कहा, “यह कानूनी प्रक्रिया है। हम चाहते हैं कि अदालत हमारी बात पूरी तरह सुने और सही तथ्यों पर जल्द विचार करे।”
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