Iran New Proposal To US: अमेरिका और ईरान के बीच लगातार तनातनी बनी हुई है। इसी बीच दोनों देश दूसरे बैठकी की बातचीत का इतंजार कर रहे है लेकिन ईरान ने अब अमेरिका के आगे नया प्रस्ताव रख दिया। बता दें कि तेहरान ने पाकिस्तानी मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिका को एक नया प्रस्ताव पेश किया है। इस प्रस्ताव में ईरान होर्मुज को फिर से खोलने और युद्ध समाप्त करने के लिए एक रूपरेखा पेश की गई है, यह लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष में एक संभावित सफलता का संकेत है।
समाधान की राह कठिन
यह राजनयिक पहल ऐसे समय में सामने आई है जब शांति प्रयासों में काफी हद तक तनाव पैदा हो चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था कि अगर तेहरान बातचीत करना चाहे तो वह अमेरिका को कॉल कर सकता है, साथ ही उन्होंने इस बात पर भी अपनी बात रखी कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने चाहिए। स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर की इस्लामाबाद यात्रा रद्द होने के बाद सीधी बातचीत की गति धीमी पड़ गई है। जिससे समाधान की राह और भी जटिल हो गई।
अमेरिका की मांग
इस तनाव में अमेरिका की यह मांग है कि ईरान कम से कम दस वर्षों के लिए यूरेनियम संवर्धन बंद करे और अपने मौजूदा परमाणु भंडार को विदेश में शिफ्ट करे। वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मध्यस्थों को सूचित किया कि इन विशिष्ट मांगों के जवाब में ईरानी नेतृत्व के भीतर फिलहाल कोई सहमति नहीं है।
दो-चरणीय योजना का सुझाव दिया
पाकिस्तान के माध्यम से प्रस्तुत रूपरेखा में एक दो-चरणीय योजना का सुझाव दिया गया है, जिसका उद्देश्य समुद्री संकट और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को प्राथमिकता के आधार पर संबोधित करना है। इस नवीनतम प्रस्ताव में युद्धविराम के विस्तार की लंबी अवधि या युद्ध की स्थायी समाप्ति की परिकल्पना की गई है। ईरान ने मांग रखते हुए कहा कि परमाणु वार्ता केवल बाद के चरण में शुरू होगी, विशेष रूप से समुद्री मार्ग के सुगम होने और नाकाबंदी हटने के बाद।
पाकिस्तान और ओमान के बीच कूटनीति जारी
व्हाइट हाउस ने आधिकारिक तौर पर “स्ताव प्राप्त कर लिया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि संयुक्त राज्य अमेरिका इस पर विचार करने को तैयार है या नहीं”। वहीं अब्बास अराघची पाकिस्तान और ओमान के बीच कूटनीति में लगे हुए हैं, और रूस में व्लादिमीर पुतिन के साथ उनकी उच्च स्तरीय वार्ता निर्धारित है। यह क्षेत्रीय संपर्क ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिकी नेतृत्व लंबी दूरी की कूटनीति को लेकर संशय में है।
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