Iran-US-Israel Cyber War: ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच भीषण युद्ध जारी है। यह संघर्ष अब सिर्फ मिसाइल और ड्रोन हमलों तक सीमित नहीं रहा। डिजिटल दुनिया और इंटरनेट नेटवर्क भी अब इस युद्ध का हिस्सा बन चुके हैं। युद्ध की गति धीरे होने के बजाय हर दिन तेज होती जा रही है। युद्ध की शुरुआत में अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ बड़े साइबर ऑपरेशन किए।
इसके कारण कई इलाकों में ईरान की इंटरनेट सेवा लगभग 4% तक गिर गई। फाइबर ऑप्टिक केबलों को नुकसान और साइबर हमलों ने कम्युनिकेशन सिस्टम और सेंसर नेटवर्क को प्रभावित किया। ईरान की कई सरकारी वेबसाइटें और न्यूज पोर्टल अस्थायी रूप से बंद या हैक हो गए। तेहरान में ट्रैफिक कैमरे और मोबाइल नेटवर्क से जुड़ी डिजिटल गतिविधियों को भी निशाना बनाया गया। दोनों देशों की तरफ से यह हमले लगातार जारी हैं।
Iran-US-Israel Cyber War: मोबाइल ऐप के जरिए मानसिक दबाव
ईरान में लोकप्रिय प्रेयर टाइम ऐप BadeSaba को हैक करने का दावा किया गया। इस ऐप के माध्यम से यूज़र्स को सरकार विरोधी संदेश भेजे गए। इसे साइकोलॉजिकल ऑपरेशन (PSYOPS) माना जा रहा है। इसका उद्देश्य दुश्मन को मानसिक रूप से कमजोर करना और उसे युद्ध से पीछे हटने के लिए प्रेरित करना है।
ईरान का साइबर पलटवार
ईरान की तरफ से भी साइबर हमले किए जा रहे हैं। ईरान से जुड़े 60 से अधिक हैकर और हैक्टिविस्ट समूह सक्रिय हैं। उन्होंने कई देशों की सरकारी और निजी संस्थाओं पर हमला करने का दावा किया। इन हमलों में DDoS अटैक, वेबसाइट डिफेसमेंट, डेटा चोरी, डेटा लीक और मैलवेयर या वाइपर हमले शामिल हैं।
अमेरिकी कंपनी पर बड़ा साइबर हमला
11 मार्च 2026 को ईरान से जुड़े हैकरों ने अमेरिकी मेडिकल टेक कंपनी Stryker Corporation पर हमला किया। इस हमले में करीब 50 टेराबाइट डेटा चोरी होने की खबर आई। अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने ऊर्जा, बैंकिंग, हेल्थकेयर और रक्षा क्षेत्र में साइबर हमलों का खतरा बढ़ने की चेतावनी दी। इस कारण महत्वपूर्ण डिजिटल नेटवर्क की सुरक्षा बढ़ाई गई।
हाइब्रिड युद्ध का नया दौर
यह युद्ध अब हाइब्रिड युद्ध के रूप में विकसित हो गया है। इसमें मिसाइल हमले, साइबर अटैक और मानसिक दबाव डालने वाले ऑपरेशन शामिल हैं। आने वाले समय में साइबर हमलों का खतरा और बढ़ सकता है। दोनों पक्ष लगातार हमले कर रहे हैं, लेकिन अब तक युद्ध को रोकने की कोई पहल नहीं हुई है।























