PM Rahat Yojana Kya Hai? : हर सुबह अखबारों के पन्ने रोड एक्सीडेंट की घटनाओं से भरे रहते हैं। परिवार के किसी सदस्य के साथ एक छोटा से छोटा एक्सीडेंट भी पूरे परिवार पर भारी पड़ता है और खासकर गरीब तबके से आने वाले परिवार को अपनी जमापूंजी का एक बड़ा हिस्सा इन घटनाओं के चलते हुई क्षति में खर्च करना पड़ता है। एक तरह से यह भारी डैमेज होता है जिसे रिकवर करने में उम्र लग जाती है।
आपको बता दें हर दिन भारत में 1300 रोड एक्सीडेंट की घटनाएं होती हैं। स्वास्थ्य विभाग के आँकड़े भी बताते हैं कि ज्यादातर रोड एक्सीडेंट में मौत इसलिए हो जाती है क्योंकि पहले 1 घंटे में घायल को अस्पताल नहीं ले जाया पता। क्योंकि एक तो समय पर अस्पताल नहीं मिल पाता दूसरा, निजी अस्पतालों में ऐसी घटनाओं के ट्रीटमेंट में खर्चा एक बड़ी वजह बन कर सामने आता है।

ऐसे में सवाल यह कि सरकारी अस्पतालों में जहां एक तरफ अफरातफरी और भीड़भाड़ है वहां आम लोगों के पास दूसरा क्या विकल्प बचता है? इसी बड़ी समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने PM RAHAT SCHEME को मंजूरी दे दी है. इस योजना का मकसद साफ है, सड़क हादसे के शिकार लोगों को बिना किसी देरी और बिना पैसे की चिंता के सही समय पर अस्पताल में इलाज संभव करवा पाना।
PM Rahat Yojana Kya Hai? : क्या है PM RAHAT SCHEME ?

इस योजना के तहत सड़क हादसे में घायल लोगों को सात दिनों तक अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, यह योजना देश की किसी भी कैटेगरी की सड़क पर हुई दुर्घटना के प्रत्येक पात्र पीड़ित पर लागू होगी. यानी राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य मार्ग या ग्रामिण सड़क किसी भी स्थान पर दुर्घटना होने पर घायल व्यक्ति इस सुविधा का लाभ उठा सकेगा. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि पीएम राहत योजना के तहत किन लोगों का इलाज मुफ्त होता है और इसके नियम और शर्तें क्या हैं.
PM Scheme for Road Accident Victims : पीएम राहत योजना से जुड़े नियम और शर्तें

पीएम राहत योजना के तहत दुर्घटना की तारीख से 7 दिनों तक प्रति व्यक्ति 1.5 लाख रुपये तक का खर्च सरकार उठाएगी. पेमेंट मोटर वाहन दुर्घटना कोष से सीधे हॉस्पिटल को किया जाएगा. वहीं इस योजना के तहत जीवन को खतरे में नहीं डालने वाले मामलों में ज्यादातर 24 घंटे तक और गंभीर मामलों में 48 घंटे तक स्टेबलाइजेशन इलाज उपलब्ध कराया जाएगा.
वहीं इसके बाद भी सात दिनों की अवधि के अंदर कैशलेस इलाज की सुविधा जारी रहेगी. यह पूरी प्रक्रिया एकीकृत डिजिटल प्रणाली के जरिए होगी, जिसमें पुलिस प्रमाणीकरण आवश्यक होगा. जो मामले गंभीर नहीं है उनमें 24 घंटे के अंदर और गंभीर मामलों में 48 घंटे के अंदर पुलिस की पुष्टि जरूरी होगी, ताकि इलाज बिना किसी रूकावट के चलता रहे और जवाबदेही भी सुनिश्चित हो सके.
Government Road Safety Scheme India : जरूरी मानी जा रही योजना
यह योजना जरूरी मानी जा रही है। उस का एक कारण हर साल सड़कों पर दुर्घटनाओं के चलते दम तोड़ते लोग। 2023 के पुलिस डिपार्टमेंट के आंकड़ों के अनुसार 4 लाख 80 हजार रोड एक्सीडेंट की घटनाएं घटी जिसमें लगभग 1 लाख 72 हजार लोगों से अधिक ने अपनी जान गंवाई। इन मौतों का एक बड़ा कारण घायल का समय पर अस्पताल न पहुंचना था क्योंकि कई बार घायल व्यक्ति को राहगीर अस्पताल इसलिए नहीं पहुंचा पाते क्योंकि उन्हें खुद जानकारी नहीं होती कि किस अस्पताल लेकर जाया जाए, वहां का क्या खर्च होगा और घायल वह खर्च वहाँ भी कर पाएगा?
ताकि मिले जल्दी इलाज
ऐसे में यह योजना बेहद जरूरी मानी जा रही है ताकि दुर्घटना स्थल के आसपास कोई भी अस्पताल हो उस में घायल का इलाज शीघ्र से शीघ्र हो सके।
इस योजना के तहत पूरा का पूरा खर्चा डिजिटल पेमेंट के माध्यम से होगा, यह योजना 2 डिजिटल सिस्टम पर आधारित है, एक E-DAR, जिसे केन्द्रीय परिवहन मंत्रालय ऑपरैट करता है दूसरा ट्रांजेक्शन मैनेजमेंट सिस्टम जिसकी जिम्मेदारी नैशनल हैल्थ अथॉरिटी के पास है। इनका काम दुर्घटना से जुड़ी जानकारी को एक लाइन में आगे बढ़ाना। अस्पताल को इलाज का खर्च मोटर व्हीकल एक्सीडेंट से मिलता है, और अगर हादसे में शामिल वाहन का बीमा है तो बीमा कंपनियों से पैसा मिलेगा।
इसी प्रकार अगर बीमा से जुड़ी कोई शिकायत है तो उसका निपटारा जिला सड़क सुरक्षा समिति के तहत किया जाता है। इस योजना के तहत पुलिस, परिवहन, स्वास्थ्य और बीमा को एक साथ लाया गया है। हालांकि इस का असली असर इस बात पर निर्भर करता है कि अस्पताल कितनी संख्या में जुडते हैं और 112 कितनी तेजी से काम करता है।


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