Software Engineer Yuvraj Mehta death: नोएडा के सेक्टर 150 में जलभराव के चलते सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे पर्यावरण कानूनों के गंभीर उल्लंघन का मामला माना है। न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और एक्सपर्ट मेंबर डॉ. ए. सेंथिल वेल की बेंच ने कहा कि यह घटना प्रशासनिक लापरवाही और स्टॉर्म वाटर मैनेजमेंट सिस्टम की विफलता को उजागर करती है। एनजीटी ने इसे बेहद गंभीर मामला बताया।
Noida Authority negligence: स्थायी तालाब में तब्दील इलाका
जानकारी के अनुसार, जिस जमीन पर युवराज मेहता की मौत हुई, वह पहले एक निजी मॉल परियोजना के लिए आवंटित थी। बीते करीब एक दशक से वहां वर्षा जल और आसपास की हाउसिंग सोसाइटीज का वेस्ट वाटर जमा होता रहा, जिससे यह क्षेत्र स्थायी तालाब में बदल गया।
Yuvraj Mehta death case: योजना बनी, लेकिन लागू नहीं हुई
घने कोहरे के दौरान युवराज तेज मोड़ पर कार से नियंत्रण खो बैठे और पानी से भरी गहरी ट्रेंच में गिर गए, जिससे उनकी डूबकर मौत हो गई। एनजीटी ने 2015 में बनी स्टॉर्म वाटर मैनेजमेंट योजना के लागू न होने पर गंभीर चिंता जताई। सिंचाई विभाग ने हिंडन नदी में हेड रेगुलेटर लगाने का प्रस्ताव दिया था और 2016 में इसके लिए 13.05 लाख रुपये भी जारी किए गए, लेकिन योजना कागजों तक सीमित रही।
NGT strict action: विभागों को नोटिस, जवाब तलब (Software Engineer Yuvraj Mehta death)
हेड रेगुलेटर न होने से वर्षों से जलभराव की समस्या बनी रही। एनजीटी ने नोएडा अथॉरिटी, यूपीपीसीबी, सिंचाई विभाग, गौतमबुद्ध नगर के जिलाधिकारी और पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव को नोटिस जारी किया है।
सभी को अगली सुनवाई से एक सप्ताह पहले हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल 2026 को होगी।
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