Strait of Hormuz Big Update: एक दिन पहले पूरी तरह से खुले Strait of Hormuz को लेकर एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। ईरान ने दावा किया है कि उसने इस अहम समुद्री रास्ते को पूरी तरह से नहीं खोला है और जब तक अमेरिका की तरफ से लगाई गई नाकाबंदी जारी रहेगी, तब तक यहां सामान्य आवाजाही संभव नहीं होगी। ईरान का कहना है कि यह कदम अमेरिकी दबाव के जवाब में उठाया गया है। ईरान ने इससे पहले शुक्रवार को इस रास्ते को खोलने की बात कही थी।
खासकर सीजफायर के दौरान व्यापारिक जहाजों को गुजरने की अनुमति देने की बात कही गई थी। हालांकि, यह पूरी तरह से खुला नहीं था। ईरान के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक यह रास्ता सीजफायर के दौरान और कुछ शर्तों के साथ खोला गया था. इस दौरान सैन्य जहाजों और दुश्मन ताकतों से जुड़े जहाजों को यहां से गुजरने की अनुमति नहीं होगी। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर लेबनान में ईरान समर्थित संगठन हिज्बुल्लाह पर दबाव बढ़ेगा तो यह व्यवस्था बदल भी सकती है।
Strait of Hormuz Big Update: अमेरिका की सख्त चेतावनी
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ कर दिया है कि जब तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर कोई बड़ा समझौता नहीं करता, तब तक नाकाबंदी जारी रहेगी। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई कर सकता है। ट्रंप ने यहां तक कहा कि जरूरत पड़ी तो ईरान के यूरेनियम भंडार को अपने तरीके से नियंत्रित किया जाएगा।
वार्ता पर ईरान का रुख
ईरान ने अमेरिका के साथ होने वाली अगली शांति वार्ता में शामिल होने से फिलहाल इनकार कर दिया है। ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान ने एक मध्यस्थ के जरिए अमेरिकी अधिकारियों को यह संदेश भेजा है कि वह अभी बातचीत के अगले दौर के लिए तैयार नहीं है। ईरान ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उसकी नाकाबंदी असल में समुद्री डकैती जैसी है। IRGC का कहना है कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन कर रहा है और समुद्री व्यापार को नुकसान पहुंचा रहा है।
होर्मुज की अहमियत
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है। यह ईरान और ओमान के बीच स्थित है और यहां से बड़ी मात्रा में वैश्विक तेल आपूर्ति होती है। इसकी कुल चौड़ाई करीब 33 किलोमीटर है, लेकिन जहाजों के लिए सुरक्षित रास्ता केवल लगभग 3-3 किलोमीटर का होता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक तेल बाजार को सीधे प्रभावित करता है।
ट्रंप ने यह भी कहा है कि अगर तय समय सीमा तक कोई समझौता नहीं होता, तो सीजफायर खत्म किया जा सकता है और फिर से हमले शुरू हो सकते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका ईरान के बंदरगाहों पर दबाव बनाए रखेगा और जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई से भी पीछे नहीं हटेगा।
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