Suvendu Adhikari on Bengal Election Counting: पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजे 4 मई को जारी होंगे। इस बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता और उम्मीदवार सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के पिंगला और दासपुर विधानसभा क्षेत्रों में मतगणना के दिन संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) कर्मचारियों की तैनाती पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस मुद्दे को लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता से जोड़ते हुए चिंता जताई है कि कहीं इससे जनादेश प्रभावित न हो जाए। उनका कहना है कि मतगणना जैसे संवेदनशील काम में अस्थाई कर्मचारियों की भूमिका उचित नहीं है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह व्यवस्था जनादेश में हेरफेर की साजिश का हिस्सा हो सकती है। उन्होंने कहा कि यदि मतगणना में ऐसे लोगों को शामिल किया जाता है जिनकी नौकरी स्थायी नहीं है, तो वे राजनीतिक दबाव में आ सकते हैं। इससे चुनाव की पारदर्शिता और भरोसे पर असर पड़ सकता है।
Suvendu Adhikari on Bengal Election Counting: संविदा कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल
उन्होंने एक पोस्ट में लिखा कि क्या लोकतंत्र का भविष्य संविदा कर्मचारियों के हाथों में सौंपा जा रहा है? यह एक गंभीर विषय है। अधिकारी के अनुसार, 227-पिंगला और 230-दासपुर विधानसभा क्षेत्रों के मतगणना आदेशों में बड़ी संख्या में अस्थाई कर्मचारियों को शामिल किया गया है। इनमें जीविका सेवक, सहायक और संविदात्मक मतदान अधिकारी जैसे पद शामिल हैं, जो मतगणना कार्यों में लगाए गए हैं।
भाजपा नेता ने यह भी सवाल उठाया कि ईवीएम, वीवीपीएटी और डाक मतपत्र जैसे संवेदनशील चुनावी उपकरणों को संभालने की जिम्मेदारी अस्थाई कर्मचारियों को कैसे दी जा सकती है। उनका कहना है कि ऐसे कार्यों के लिए अनुभवी और स्थायी सरकारी कर्मचारियों की जरूरत होती है, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी या दबाव की संभावना कम हो।
कुछ नामों का भी किया उल्लेख
अधिकारी ने दावा किया कि पिंगला विधानसभा क्षेत्र में बिपालेंदु बेरा, शंकर पहाड़ी और नबा कुमार अपिक जैसे संविदा कर्मचारी मतगणना टीम में शामिल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि रिजर्व टैगिंग और ईवीएम से जुड़े कार्यों में भी बड़ी संख्या में संविदा कर्मी लगाए गए हैं, जो चिंता का विषय है।
चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की मांग
सुवेंदु अधिकारी ने मुख्य चुनाव आयुक्त और राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि मतगणना प्रक्रिया में केवल नियमित और स्थायी सरकारी कर्मचारियों को ही लगाया जाना चाहिए, ताकि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे। अंत में उन्होंने कहा कि जनता के जनादेश के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चुनाव आयोग से अपील की कि वह इस मामले में सख्त कदम उठाए और यह सुनिश्चित करे कि मतगणना प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो।
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