‘यह सब जानबूझकर किया जा रहा है…’, संस्कृत पेपर में पूछी गई पहेली पर गरमाई सियासत, अखिलेश यादव ने सरकार को घेरा

UP Sanskrit Exam Controversy Update

UP Sanskrit Exam Controversy Update: उत्तर प्रदेश में भर्ती और परीक्षाओं को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। हाल ही में यूपी एसआई भर्ती परीक्षा में ‘पंडित’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर उठे विवाद के बाद अब एक नया मामला सामने आया है। इस बार विवाद बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले परिषदीय स्कूलों की कक्षा 7 की संस्कृत परीक्षा से जुड़ा है। एक सवाल में पूछी गई पहेली को लेकर लोगों ने आपत्ति जताई है, जिसके बाद मामला राजनीतिक रंग लेता जा रहा है।

UP Sanskrit Exam Controversy Update: क्या है पूरा मामला?

दरअसल, कक्षा 7 की संस्कृत परीक्षा में एक पहेली पूछी गई, “बिना पैर के दूर तक जाता है और साक्षर है, परंतु पंडित नहीं है।” इस सवाल को लेकर कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि इसमें ‘पंडित’ शब्द का प्रयोग आपत्तिजनक तरीके से किया गया है। उनका कहना है कि इस तरह के प्रश्न किसी विशेष समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकते हैं। सोशल मीडिया पर भी इस सवाल को लेकर बहस तेज हो गई है।

अखिलेश यादव ने उठाए सवाल

इस विवाद पर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे एक समाज विशेष का अपमान बताया। उनका कहना है कि इस तरह के सवाल यह संकेत देते हैं कि कहीं न कहीं यह सब जानबूझकर किया जा रहा है। अखिलेश यादव ने यह भी सवाल उठाया कि प्रश्नपत्र तैयार करने वाली समिति में क्या विविध समाज के लोगों को शामिल किया जाता है या नहीं। उनका मानना है कि अगर सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व होता, तो शायद इस तरह के सवाल नहीं पूछे जाते।

पोस्ट के जरिए जताई नाराजगी

अखिलश यादव ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में इस मुद्दे पर नाराजगी जताते हुए कई काल्पनिक सवालों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अगर इसी तरह सवाल बनाए जाते रहे, तो भविष्य में और भी विवादित प्रश्न सामने आ सकते हैं। उनके मुताबिक, परीक्षा का उद्देश्य ज्ञान बढ़ाना होना चाहिए, न कि किसी भी तरह की भावनात्मक चोट पहुंचाना। अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में कई तरह के सवाल पूछे:

विशिष्ट प्रश्न

1. ‘हाता नहीं भाता’ कहावत है या मुहावरा, अर्थ सहित समझाइए।
2. एक समाज विशेष की बैठकों पर नोटिस किसने दिया?⁠
3. कुंभ मेले में शंकराचार्य जी के स्नान की सनातनी परंपरा किसने तुड़वाई?
4. एक नव विवाहित को निरपराध किसने जेल में रखा।
5. एक ग़रीब माँ-बेटी की झोपड़ी में आग लगवाने और उसमें ज़िंदा जल जाने की घटना किसके शासन काल में हुई?
6. एक समाज विशेष के सम्मानित व्यक्ति की मूरत किसने नहीं लगने देने के लिए चबूतरा तोड़क कार्रवाई किसके निर्देश पर हुई?
7. बाराबंकी में किसने, किसकी पिटाई करवाई और उसका निहित उद्देश्य व मूल संदेश क्या और किसको था?

अनुषांगिक प्रश्न

8. हमारे देश के स्वतंत्रता आंदोलन में कौन लोग देशद्रोही या खलनायक की भूमिगत भूमिका में थे?’
9. ‘वनस्पतिवादी’ किसको कहा जाता है?
10. ⁠’मुक़दमा वापसी’ को उदाहरण सहित समझाइए।

शिक्षक संघ भी आया सामने

इस पूरे मामले पर शिक्षक संगठनों ने भी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र तैयार करते समय अधिक सावधानी बरतनी चाहिए। शिक्षक संघ का मानना है कि ऐसे सवालों से छात्रों और समाज में गलत संदेश जाता है। उन्होंने यह भी मांग की है कि इस मामले की जांच की जाए और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।

पहले भी हो चुका है विवाद

यह पहला मौका नहीं है जब ‘पंडित’ शब्द को लेकर विवाद हुआ हो। इससे पहले यूपी पुलिस एसआई भर्ती परीक्षा में भी इसी शब्द के इस्तेमाल पर विवाद खड़ा हो चुका है। उस समय भी लोगों ने इसे जातिगत टिप्पणी मानते हुए विरोध जताया था। लगातार ऐसे मामलों के सामने आने से परीक्षा प्रणाली और प्रश्नपत्र निर्माण की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।

परिषदीय स्कूल क्या हैं?

परिषदीय स्कूल उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत आने वाले सरकारी स्कूल होते हैं। इनमें कक्षा 1 से लेकर कक्षा 8 तक की पढ़ाई कराई जाती है। ये स्कूल राज्य सरकार द्वारा संचालित और वित्तपोषित होते हैं, और ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों में बड़ी संख्या में छात्र यहां शिक्षा प्राप्त करते हैं।

क्या है आगे की स्थिति?

फिलहाल यह मामला चर्चा में बना हुआ है और इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। सरकार या संबंधित विभाग की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान नहीं आया है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि इस विवाद पर क्या कार्रवाई होती है और भविष्य में प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में क्या बदलाव किए जाते हैं, ताकि इस तरह के विवादों से बचा जा सके।

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