Chhattisgarh News: रायपुर में मसीही समाज के नेतृत्व को लेकर चल रहे विवाद पर चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया (CNI) ने अपना स्पष्ट और आधिकारिक पक्ष सामने रखा है। संस्था ने कहा है कि कुछ लोग खुद को मसीही समाज का अध्यक्ष या प्रतिनिधि बताकर बयान दे रहे हैं, लेकिन उनके दावों को चर्च की आधिकारिक मान्यता प्राप्त नहीं है।
सीएनआई के अंतर्गत आने वाली डायोसिस ऑफ छत्तीसगढ़ ने साफ किया कि चर्च की एक निर्धारित संरचना और प्रक्रिया होती है, जिसके तहत ही किसी व्यक्ति को अधिकार दिया जाता है। जो लोग स्वयंभू तरीके से समाज का प्रतिनिधित्व करने का दावा कर रहे हैं, वे चर्च की अधिकृत व्यवस्था का हिस्सा नहीं हैं।
Chhattisgarh News: सोशल मीडिया के जरिए दावे

डायोसिस के अनुसार, कुछ व्यक्तियों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, खासकर यूट्यूब के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संपर्क करने के दावे किए हैं। एक वीडियो में यह भी कहा गया कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से संपर्क किया गया है और व्हाइट हाउस से प्रतिनिधिमंडल बुलाने की कोशिश की जा रही है। चर्च ने इन दावों को गंभीर और भ्रामक बताया है। उनका कहना है कि इस तरह की बातें समाज में भ्रम फैलाती हैं और मसीही समुदाय की छवि को प्रभावित कर सकती हैं। संस्था ने स्पष्ट किया कि संबंधित व्यक्ति किसी भी अधिकृत चर्च निकाय का प्रतिनिधित्व नहीं करते।
डिजिटल माध्यम से धन संग्रह पर सवाल
डायोसिस ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ लोग क्यूआर कोड और अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों के जरिए धन एकत्र कर रहे हैं। चर्च का कहना है कि इस तरह से किए जा रहे धन संग्रह की वैधता और पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। संस्था ने प्रशासन से आग्रह किया है कि डिजिटल लेन-देन और सार्वजनिक बयानों की निष्पक्ष जांच की जाए। साथ ही, संबंधित वीडियो और गतिविधियों की भी जांच की मांग की गई है ताकि सच्चाई सामने आ सके। चर्च का कहना है कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।
कानूनी जांच की मांग
सीएनआई ने प्रशासन से अनुरोध किया है कि मामले की जांच सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और अन्य प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों के तहत की जाए। उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे दावों और धन संग्रह की गतिविधियों की गहन जांच जरूरी है, ताकि समाज में गलत जानकारी न फैले और किसी प्रकार का विवाद न बढ़े।
सालेम स्कूल के मामलों की जांच की मांग
डायोसिस ने सालेम स्कूल से जुड़े वित्तीय और प्रशासनिक मामलों की स्वतंत्र जांच की भी मांग की है। चर्च का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि संस्थागत मर्यादा और पारदर्शिता बनाए रखना है। संस्था का मानना है कि शिक्षा और धार्मिक संस्थाओं में पारदर्शिता बेहद जरूरी है, ताकि समाज का भरोसा बना रहे।
संविधान और सामाजिक सद्भाव के प्रति प्रतिबद्धता
अंत में, चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया ने दोहराया कि वह भारत के संविधान, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। संस्था ने कहा कि धर्म के नाम पर किसी भी प्रकार की भ्रामक या विभाजनकारी गतिविधि का समर्थन नहीं किया जाएगा। चर्च ने अपील की है कि समाज में शांति और आपसी विश्वास बनाए रखा जाए तथा किसी भी तरह की अफवाह या अप्रमाणित जानकारी पर भरोसा न किया जाए।


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