छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 17 राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर आगामी जून माह से राज्यों को जीएसटी क्षति पूर्ति की राशि बन्द करने के निर्णय पर पुनर्विचार कर उसे आगामी 10 वर्ष तक जारी रखने के लिए मिलकर केंद्र से आग्रह का अनुरोध किया हैं। बघेल ने उड़ीसा, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, गुजरात, झारखंड, राजस्थान, पंजाब, बिहार, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, आंध्रप्रदेश, हैदराबाद, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, तेलंगाना और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों को भेजे पत्र में केंद्र के क्षतिपूर्ति बन्द करने के निर्णय से राज्यों को होने वाले नुकसान का जिक्र करते हुए उनसे अनुरोध किया हैं कि इसके लिए केंद्र से साझा आग्रह करें।
जीएसटी क्षतिपूर्ति जारी रखने की बताई यह वजह
भूपेश के मुताबिक ऐसा करने से राज्यों के राजस्व को भारी हानि होने से बचाया जा सकता है और जीएसटी क्षतिपूर्ति जारी रखने अन्यथा वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जा सकती है। उन्होंने पत्र में कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता में गत वर्ष 29 दिसंबर को नई दिल्ली में राज्यों के मुख्यमंत्रियों और वित्त मंत्रियों के साथ बजट-पूर्व बैठक में छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों ने जून में समाप्त होने वाले जीएसटी मुआवजे पर चिंता व्यक्त की थी और केंद्र सरकार से इसे और पांच साल के लिए बढ़ाने का अनुरोध किया, जबकि इस मामले में सभी राज्य केंद्र सरकार से सकारात्मक निर्णय की उम्मीद रखते हैं।
छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश जैसे उत्पादक राज्यों को होगा बड़ा नुकसान
बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश जैसे उत्पादक राज्यों के लिए जीएसटी क्षतिपूर्ति नहीं मिलना एक बड़ा वित्तीय नुकसान होगा। वि-निर्माण राज्य होने के नाते, देश की अर्थव्यवस्था के विकास में हमारा योगदान उन राज्यों की तुलना में बहुत अधिक है, जिन्हें वस्तुओं और सेवाओं की अधिक खपत के कारण जीएसटी शासन से लाभ हुआ है। यदि जीएसटी क्षतिपूर्ति जून से आगे जारी नहीं रखा गया तो छत्तीसगढ़ को भारी राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। आगामी वित्तीय वर्ष में लगभग 5,000 करोड़ का नुकसान हो सकता है। ठीक इसी तरह दूसरे राज्यों को भी आगामी वित्तीय वर्ष में राजस्व प्राप्तियां कम होगी और राज्यों को इस समस्या से जनहित के कार्यों और विकास कार्यों के लिए पैसों की व्यवस्था करना बहुत कठिन हो जाएगा।
भूपेश बघेल ने की साझा अनुरोध की अपील
उन्होंने कहा कि जीएसटी व्यवस्था की शुरुआत के बाद टैक्स नीति पर राज्यों की स्वतंत्रता बहुत कम हो गई है। वाणिज्यिक टैक्स के अलावा, राज्यों के पास टैक्स राजस्व की अन्य मदों में राजस्व बढ़ाने के लिए विकल्प नहीं बचे हैं। इसलिए, अर्थव्यवस्था पर कोविड-19 के दुष्प्रभाव से उबरने के लिए और राज्यों को जीएसटी का यथोचित लाभ मिलने तक, राज्यों को केंद्र सरकार से अनुरोध करना चाहिए कि वह कम से कम अगले पांच वर्ष के लिए जीएसटी की कमी के लिए क्षतिपूर्ति के मौजूदा तंत्र को जारी रखे। बघेल ने विश्वास जताया कि राज्य उनकी बात से सहमत होंगे और एक साथ इस मुद्दे पर केंद्र से सहमति का साझा अनुरोध करेंगे।


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