नागरिकता संशोधन कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने मंगलवार को आपत्ति जताई । उन्होंने कहा कि यह भारत का आंतरिक मामला है और कानून बनाने के लिए भारतीय संसद के संप्रभु अधिकार है।
उन्होंने कहा कि हम स्पष्ट हैं कि सीएए संवैधानिक रूप से मान्य है । सीएए संवैधानिक मूल्यों की सभी आवश्यकताओं का अनुपालन करता है। यह भारत के विभाजन की त्रासदी से उत्पन्न मानवाधिकार मुद्दे लंबे समय से चली आ रही जो राष्ट्रीय प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
रविश कुमार ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है जो कानून के शासन द्वारा शासित है। हम सभी को अपनी स्वतंत्र न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। हमें विश्वास है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा हमारी ध्वनि और कानूनी रूप से स्थायी स्थिति को संरक्षित किया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि जेनेवा में हमारे स्थायी मिशन को कल शाम संयुक्त राष्ट्र के उच्चायुक्त ने मानवाधिकार के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि उनके कार्यालय ने 2019 नागरिकता संशोधन अधिनियम के संबंध में भारत के सर्वोच्च न्यायालय में एक हस्तक्षेप आवेदन दायर किया। उन्होंने कहा कि हम दृढ़ता से मानते हैं कि किसी भी विदेशी पार्टी के पास भारत की संप्रभुता से संबंधित मुद्दों पर कोई नियंत्रण नहीं है।


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