आज भारत में इतिहास रच दिया। पूरे 40 दिन बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन को एक बड़ी सफलता मिली है। जिसका सफल 14 जुलाई के दिन श्रीहरिकोटा से शुरू हुआ और उसको चांद पर जाते ही अपनी मंजिल मिल गई। आज 6:04 पर भारत के मिशन चंद्रयान 3 में सफलतापूर्वक चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग की इसके बाद से ही पूरे देश भर में ढोल नगाड़े बजने शुरू हो गए। लैंडिंग से पहले पूरे देश भर में यह कामना की जा रही थी की सफलतापूर्वक भारत के चांद पर जाने के इस तीसरे मिशन को कामयाबी मिल जाए। पिछली बार साल 2019 में चंद्रयान-2 की और सफलता के कारण कई निराशा हाथ लगी थी लेकिन इस निराशा में एक एसी उम्मीद थी जिसने चंद्रयान 3 को सफल होने में सबसे ज्यादा सहयोग किया और वह था सबक! चंद्रयान-2 के वक्त जो गलती वैज्ञानिकों ने की थी उनसे सबक लेकर उन्होंने इस बार अपने मिशन में हर तकनीक का प्रयोग किया। अधिक जानने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर ज़रूर क्लिक करें –
भारत को मिली एक बड़ी सफलता!
भारत आज सफलता के कदम चूम रहा है जहां एक के बाद एक भारत के विश्व भर में बढ़ते कदम को काफी सराहना मिल रही है। आज चंद्रयान-3 के लैंडिंग का लाइव प्रसारण पूरे देश और विश्व भर में कराया गया जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी वर्चुअली इसरो के वैज्ञानिकों के साथ जुड़े हुए थे लैंडिंग के बाद पूरे देश में तालिया की गूंज सुनाई देने लगी जिसमें एक आवाज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी थी जिन्होंने दक्षिण अफ्रीका की धरती में बैठकर भारतीय धरती को संबोधित किया साथ ही इसरो के इस कामयाबी को देश की कामयाबी बताई। पीएम मोदी ने बताया कि भारत पहला ऐसा देश है जो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचा इससे पहले ऐसा कोई भी देश नहीं था जिसने ऐसा किया भी हो। लेकिन अब सवाल यह उठता है के सफलतापूर्वक लैंडिंग के बाद इसरो का दूसरा प्लान क्या है? अब चंद्रयान-3 चंद्रमा की सतह पर क्या करने वाला है साथ ही वह क्या पता लगाने वाला है? इन सभी सवालों का जवाब आप जरूर जानना चाहते होंगे इसलिए आज हम आपके लिए वह पूरी जानकारी लेकर आए हैं जो आपकी जिज्ञासा चंद्रमा में बढ़ा देगी।
चंद्रयान- 3 का क्या है अगला प्लान?
चंद्रयान की सफलता के बाद ही इसको लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। जिसमें एक सवाल यह भी है कि चांद की सतह पर चंद्रयान-3 के उतरने के बाद आखिर क्या होने वाला है तो आपको बता दे कि अब चांद पर मून वॉक किया जाएगा। जी हां अब रोवर और लैंडर चांद की सतह पर उतरेंगे साथ ही जो चंद्रमा की सतह का विश्लेषण और उसके बारे में जानकारी को इकट्ठा करेंगे । जहां विक्रम और लैंडर चंद्र दिवस तक जीवित रहने वाले हैं, जो पृथ्वी के लिए 14 दिनों के समान है। बता दे चंद्र दिवस वह दिन होता है जब सूर्य चंद्रमा पर चमकता है। जब तक सूर्य चंद्रमा पर चमकता रहेगा तब तक चंद्रयान-3 से होते रोबोट और लैंडर जीवित रहेंगे। लेकिन जैसे ही सूरज चंद्रमा से डूबेगा तो तापमान में काफी हलचल दिखाई देगी जहां 0 डिग्री सेल्सियस से लेकर 180 डिग्री सेल्सियस तापमान तक बदलाव हो जाएगा। विक्रम और लैंडर चांद की सतह पर उतरकर कई अन्य जानकारी को भी एकत्रित करने वाले हैं।


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