जस्टिस रंजन गोगोई सुप्रीम कोर्ट के नए चीफ जस्टिस के रूप में आज पद संभालेंगे। इसी के साथ वो भारत के 46वें मुख्य न्यायाधीश बन जाएंगे। व्यवस्थित रहना और सारी चीजें करीने से रखना पसंद करने वाले जस्टिस गोगोई से देश और न्यायपालिका को काफी उम्मीदें हैं। जस्टिस गोगोई पूर्वोत्तर से इस पद पर नियुक्त होने वाले पहले चीफ जस्टिस बन जाएंगे। असम में नागरिकता रजिस्टर बनाने का फैसला जस्टिस गोगोई ने ही दिया था। जस्टिस गोगोई की छवि एक बेहद सख्त और ईमानदार जज की है।
जस्टिस रंजन गोगोई साल 2001 में गुवाहाटी हाईकोर्ट के जज बने। साल 2011 में वो पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस भी रहे। साल 2012 में जस्टिस रंजन गोगोई को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया। जस्टिस रंजन गोगोई बुधवार को जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ के साथ मुख्य न्यायाधीश की अदालत में मुकदमों की सुनवाई करने बैठेंगे। पहले दिन भले ही उनकी अदालत में सुनवाई के लिए कम मुकदमें लगे हों, लेकिन देश भर की अदालतों में लंबित 2.77 करोड़ मुकदमें नये मुखिया की नयी योजना का इंतजार उनके शपथ लेते ही शुरु कर देंगे।
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इन मुकदमों में 13.97 लाख मुकदमें वरिष्ठ नागरिकों के हैं और 28.48 लाख मुकदमें महिलाओं ने दाखिल कर रखे हैं। इतना ही नहीं उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट मे लंबित 54000 मुकदमें भी अपने मुखिया की नयी कार्यप्रणाली और शीघ्र मुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। जस्टिस रंजन गोगोई का मुख्य न्यायाधीश के तौर पर करीब 14 महीने का कार्यकाल है। वह 17 नवंबर 2019 तक इस पद पर रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट मे न्यायाधीशों के कुल 31 मंजूर पद हैं जिसमे से अभी 25 न्यायाधीश काम कर रहे हैं।
जस्टिस दीपक मिश्रा के सेवानिवृत होने के बाद यह संख्या घट कर 24 रह जाएगी। जस्टिस रंजन गोगोई के कार्यकाल में पांच और न्यायाधीश सेवानिवृत होंगे और सुप्रीम कोर्ट की कुल रिक्तियां 11 हो जाएंगी। हाई कोर्ट में भी जजों के 427 पद रिक्त हैं। न्यायाधीशों के खाली पड़े पद और अदालतों में ढांचागत संसाधनों की कमी भी मुकदमों के ढेर का एक बड़ा कारण है। इन सभी पहलुओं को देखना होगा।


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