कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र सरकार देश के लोगों के खिलाफ ही खड़ी हो गई है और देश के 1.3 अरब लोगों पर अपनी दमघोंटू विचारधारा थोप रही है। एक कार्यक्रम में अपने संबोधन में राहुल ने कहा कि भाजपा सरकार कहती है कि वह पत्रकार-कार्यकर्ता गौरी लंकेश जैसे चिंतकों को नापसंद करती है।
गौरी लंकेश की पिछले साल गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। राहुल ने कहा, ‘आज हम भारत में जो देखते हैं, वह भारतीय कल्पना को बदनाम कर रहा है। भारत सरकार अपने ही लोगों के खिलाफ खड़ी हो गई है क्योंकि वह देश की 1.3 अरब आबादी पर एक ही विचारधारा थोपना चाहती है।’
उन्होंने कहा, ‘वह हमारे 1.3 अरब लोगों पर एक दमघोंटू विचारधारा थोपना चाहती है। युद्ध की प्रकृति क्या होती है। किसान आत्महत्या कर रहे हैं। अर्थव्यवस्था डगगमा रही है, रुपया निम्न स्तर पर है, पेट्रोल सर्वकालिक रिकॉर्ड स्तर पर है, शेयर बाजार में हाहाकार मचा है। बैंकों का एनपीए (डूबा हुआ कर्ज) 12 लाख करोड़ रुपये है और बैंकिंग प्रणाली ध्वस्त हो गई है। बेरोजगारी 20 साल के उच्च स्तर पर है।’
उन्होंने कहा कि लोगों की अपेक्षाएं गुस्से में तब्दील हो रही हैं। दलित और जनजातीय लोग देशभर में आंदोलन कर रहे हैं और अल्पसंख्यकों पर हमले किए जा रहे हैं। राहुल ने कहा कि मीडिया में हमारे दोस्तों को बर्खास्त किया जा रहा है क्योंकि वे प्रधानमंत्री की आलोचना करते हैं। गौरी लंकेश को अपनी लेखनी की वजह से गोली मार दी गई।
‘गठबंधन सहयोगी चाहेंगे, तो प्रधानमंत्री बनने को तैयार’
राहुल गांधी ने कहा कि अगर गठबंधन सहयोगी उन्हें प्रधानमंत्री बनाना चाहेंगे तो वह प्रधानमंत्री बनने के लिए तैयार हैं। कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री बनने की उनकी इच्छा व्यक्त किए जाने के बारे में पूछे जाने पर, उन्होंने कहा कि यह द्विस्तरीय प्रक्रिया है। पहला भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) को हराना और दूसरा चुनाव बाद प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के बारे में निर्णय लेना। जब प्रधानमंत्री बनने के मुद्दे के बारे में पूछा गया तो, राहुल ने कहा, ‘अगर वे (गठबंधन) मुझे प्रधानमंत्री बनाना चाहेंगे, तो मैं निश्चित ही प्रधानमंत्री बनना चाहूंगा।’
उनके व उनकी मां सोनिया गांधी के बीच समानता और अंतर के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘उन्होंने मुझे धर्य सिखाया। मैं उतावला हुआ करता था। दोनों में सुनने की क्षमता है, लेकिन मैं कभी-कभी उनसे कहता हूं कि आपमें काफी धर्य है।’ राहुल ने कहा, ‘वह मुझे कहती हैं कि वह ‘साहसी भावना’ के साथ आगे बढ़ती हैं और मैं सोच के आधार पर..मैं इससे सहमत नहीं हूं।’
उन्होंने कहा, ‘नेतृत्व क्रमिक विकास है, यह एक गतिशील प्रक्रिया है। एक नेता के तौर पर मेरे क्रमिक विकास में, मैं ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुनता हूं और समझने की कोशिश करता हूं कि वे क्या चाहते हैं।’


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