“तारीख पे तारीख” के पुराने दौर को खत्म करते हुए चंडीगढ़ पुलिस ने तीन नए आपराधिक कानूनों (New criminal law) के क्रियान्वयन के पहले साल में ही 91 प्रतिशत से अधिक सजा दर हासिल की है। चंडीगढ़ भारत का पहला शहर था जिसने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) को पूरी तरह से लागू किया। पिछले साल 1 जुलाई से नए कानूनों ने ब्रिटिश काल की भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह ले ली।
2024 में पीएम ने की थी घोषणा
दिसंबर 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चंडीगढ़ में इन कानूनों के सफल क्रियान्वयन की घोषणा की थी। इससे पहले अगस्त में गृह मंत्री अमित शाह ने भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए चार डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किए थे। एक साल के बदलाव का ब्यौरा साझा करते हुए चंडीगढ़ एसएसपी कंवरदीप कौर ने कहा कि कुल 78 मामलों में से 71 में दोषसिद्धि हुई, जिसके परिणामस्वरूप BNS के तहत 91.1 प्रतिशत दोषसिद्धि दर हुई। ये दोषसिद्धि पंजीकरण की तारीख से 109 दिनों के रिकॉर्ड समय में हासिल की गई। 29 जून तक, यूटी पुलिस ने नए कानूनों (New criminal law) के तहत 1,459 ई-एफआईआर सहित 3,154 एफआईआर दर्ज की हैं। जबकि 758 मामलों में आरोपपत्र दायर किए गए हैं, औसत दोषसिद्धि का समय 300 दिनों से घटकर 110 दिन हो गया है।
एसएसपी ने बताई नई व्यवस्था
नई व्यवस्था पुरानी व्यवस्था से किस प्रकार भिन्न है, इस पर एसएसपी ने कहा कि मामले की संपत्ति की तलाशी और जब्ती की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी ई-सक्षम एप्लीकेशन के माध्यम से दर्ज की गई तथा एफआईआर के साथ समन्वयित की गई, जिससे डिजिटल साक्ष्य के साथ मामलों को साबित करने में मदद मिली। (New criminal law) ई-साक्ष्य एप्लीकेशन में सबूतों का क्लाउड स्टोरेज, हैश वैल्यू और जियो-टैगिंग की सुविधा है। इससे छेड़छाड़ या हेराफेरी को रोका जा सकता है।
पांच सीएफएसएल अपराध दल और एक स्टैंडबाय दल का गठन किया गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि 7 वर्ष से अधिक कारावास वाले सभी मामलों में अपराध स्थल का 24×7 निरीक्षण किया जा सके। (New criminal law) गांधीनगर स्थित राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (एनएफएसयू) के माध्यम से 14 फोरेंसिक विश्लेषकों को नियुक्त करने के अलावा, वैज्ञानिक विश्लेषण करने के लिए 68 सीएफएसएल विशेषज्ञों और 22 आईटी विशेषज्ञों की भी भर्ती की गई है।
क्यूआर कोड लगाने से कस्टडी की चेन सुनिश्चित
कंवरदीप ने कहा, “जब्त की गई संपत्ति और मैसेंजर विवरण पर क्यूआर कोड लगाने से कस्टडी की चेन सुनिश्चित होती है।” उन्होंने कहा कि ई-साक्ष्य डेटा तुरंत अदालतों के लिए उपलब्ध था।उन्होंने कहा, “प्रौद्योगिकी के बेहतर उपयोग के साथ, हमें इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, फोरेंसिक टूल, सीसीटीएनएस/आईसीजेएस प्लेटफॉर्म का उपयोग करने की कानूनी मंजूरी मिली है, जिसने पुलिस और अभियोजन को सशक्त बनाया है।” (New criminal law) अधिकारी iGOT कर्मयोगी पोर्टल पर शामिल हो गए हैं और उन्हें व्यापक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सभी एसएचओ, आईओ और कंप्यूटर ऑपरेटरों को नए एप्लिकेशन का उपयोग करने के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। संचालन को सुव्यवस्थित करने और अंतर-एजेंसी समन्वय को बढ़ाने के लिए, न्याय सेतु को पुलिस के लिए एक समर्पित डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के रूप में पेश किया गया है। यह अंतर-संचालनीय न्यायिक सेवा प्रणाली (ICJS) के सभी स्तंभों से डेटा तक एकीकृत पहुँच प्रदान करता है।


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