वैश्विक महामारी कोरोना वायरस ने बता दिया कि देश का स्वास्थ्य ढांचा कितना मजबूत है। केंद्र की मोदी सरकार इस दिशा में अब काफी कार्य कर रही है। केंद्र सरकार ने रविवार को यहां कहा कि भारत सरकार ने 2014 से अब तक 157 नए मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी है और इन परियोजनाओं पर कुल 17,691.08 करोड़ रुपये का निवेश किया है।
इन परियोजनाओं के पूरा होने पर लगभग 16,000 स्नातक मेडिकल सीटें जोड़ी जाएंगी। इनमें से 64 नए मेडिकल कॉलेजों के कामकाज के साथ 6,500 सीटें पहले ही सृजित की जा चुकी हैं। बयान में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने देश में एमबीबीएस की सीटें बढ़ाने के लिए मौजूदा राज्य सरकारों या केंद्र सरकार के मेडिकल कॉलेजों के उन्नयन के लिए भी लगभग 2,451.1 करोड़ रुपये प्रदान किए हैं।
इनको मिली वरीयता, जानें क्यों-
इस योजना के तहत मेडिकल कॉलेज उन जिलों में स्थापित किए जाते हैं, जिनमें न तो सरकारी या निजी मेडिकल कॉलेज है। वंचित, पिछड़े और आकांक्षी जिलों को वरीयता दी जाती है। योजना के तीन चरणों के तहत 157 नए मेडिकल कॉलेज स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 63 मेडिकल कॉलेज पहले से ही काम कर रहे हैं। केंद्र प्रायोजित योजना के तहत स्थापित किए जा रहे 157 नए कॉलेजों में से 39 आकांक्षी जिलों में स्थापित किए जा रहे हैं।
केंद्र प्रायोजित योजना भी लागू कर रहा है
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि सरकारी कॉलेजों में 10,000 एमबीबीएस सीटें सृजित करने के उद्देश्य से मंत्रालय एमबीबीएस सीटों को बढ़ाने के लिए मौजूदा राज्य सरकार, केंद्र सरकार के मेडिकल कॉलेजों के उन्नयन के लिए केंद्र प्रायोजित योजना भी लागू कर रहा है।
पूर्वोत्तर राज्यों और विशेष श्रेणी के राज्यों के लिए परियोजना के लिए वित्त पोषण पैटर्न क्रमश: केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा 90:10 है। हालांकि, अन्य राज्यों के लिए अनुपात 60:40 है, जिसकी ऊपरी सीमा लागत 1.20 करोड़ रुपये प्रति सीट है। मंत्रालय ने कहा कि 15 राज्यों में कुल 48 कॉलेजों को 3,325 सीटों की वृद्धि के लिए मंजूरी दी गई है, जिसमें 6,719.11 करोड़ रुपये केंद्र के हिस्से के रूप में जारी किए गए हैं।


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