प्रयागराज : इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बुलंदशहर भूमि अधिग्रहण घोटाले में सार्वजनिक धन की हेराफेरी के मामले की जांच करने का सीबीआई को सोमवार को निर्देश दिया। कमल सिंह और अन्य किसानों द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल औऱ न्यायमूर्ति एस एस शमशेरी की पीठ ने यह आदेश पारित किया। उल्लेखनीय है कि फरवरी, 1991 में औद्योगिक विकास के उद्देश्य से यूपीएसआईडीसी के लिए करीब 969 एकड़ भूमि का अधिग्रहण करने के लिए एक अधिसूचना जारी की गई थी। एसएलएओ ने उस समय मुआवजे के लिए 2,87,14,996 रुपये निर्धारित किया था।
कुछ किसानों के मुआवजे की इस राशि से असंतुष्ट रहने पर इसे बढ़ाकर 7,13,37,504 रुपये कर दिया गया था। हालांकि कई किसानों ने जमीन पर से कब्जा नहीं छोड़ा। यूपीएसआईडीसी ने भूमि का हस्तांतरण टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कारपोरेशन को करने के लिए 2013 में उसके साथ एक करार किया और इस बीच अधिकारियों ने खुद ही मुआवजा बढ़ाकर 387 करोड़ 17 लाख 71 हजार 833 रुपये कर दिया जो पूर्व में निर्धारित मुआवजे की राशि से करीब 380 करोड़ रुपये अधिक थी। यह राशि एक्स ग्रेशिया मुआवजा की आड़ में बढ़ाई गई, जबकि किसानों को मुआवजा पहले ही दिया जा चुका था।
याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अदालत का कहना था, “उच्च अधिकारियों ने स्वयं से ही एक्स ग्रेशिया मुआवजा भुगतान करने का निर्णय कर लिया था जो उन्हें पता था कि यह अवैध है।” इस तरह से अदालत ने सीबीआई को प्रारंभिक जांच करने और घोटाले का खुलासा करने के लिए एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि सीबीआई जांच की रिपोर्ट तीन माह बाद इस अदालत को सीलबंद लिफाफे में सौंपेगी। इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 11 मई तय की गई है।


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