केजीएमयू के दंत रोग विभाग में कबाड़ हो रही मशीनें

Summary :

किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) का प्रॉस्थोडॉन्टिक्स विभाग गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। विभाग की सिरैमिक लैब में करोड़ों रुपये के उपकरण और मशीनें कई सालों से खराब पड़ी हैं, जिसके कारण लैब पूरी तरह ठप हो चुकी है।

देश के सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में से एक, किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) का प्रॉस्थोडॉन्टिक्स विभाग इन दिनों गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। सूत्रों की बात पर यकीन करें तो संस्थान के प्रॉस्थोडॉन्टिक्स विभाग की सिरैमिक लैब में करोड़ों रुपये की मशीनें और उपकरण पिछले कई सालों से धूल फांक रहे हैं।

स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि लैब पूरी तरह ठप पड़ी है, जिससे यहाँ पढ़ने वाले दंत चिकित्सा (डेंटिस्ट्री) के छात्रों का भविष्य और मरीजों का इलाज दोनों दांव पर लग गए हैं। लापरवाही की इंतहा ऐसी है कि अस्पताल के प्रवक्ता डा.के के सिंह को कई बार फोन करने के बाद भी न उनका फोन नहीं उठता, ऐसे में अस्पताल के जिम्मेदारों का अस्पताल और मरीजों के प्रति कितना समर्पण होगा, इसका अंदाजा आप स्वयं लगा सकते हैं।

छात्रों और मरीजों की बढ़ी परेशानी

KGMU Prosthodontics Department
KGMU Prosthodontics Department

प्रॉस्थोडॉन्टिक्स विभाग में छात्रों की पढ़ाई भगवान भरोसे है। दंत चिकित्सा की पढ़ाई में थ्योरी से कहीं ज्यादा महत्व प्रैक्टिकल का होता है। क्राउन, ब्रिज, डेन्चर और सिरैमिक टीथ बनाने का काम इसी सिरैमिक लैब में होता है। मशीनों के खराब होने से जहां पोस्ट-ग्रेजुएट व अंडर-ग्रेजुएट छात्रों को हाथ पर हाथ धरे बैठना पड़ रहा है। उन्हें अपने भविष्य की चिंता सता रही है कि प्रैक्टिस नहीं करेंगें तो हम डेंटिस्ट्री कैसे सीखेंगे? वहीं केजीएमयू में रोजाना सैकड़ों गरीब मरीज सस्ते और गुणवत्तापूर्ण इलाज की उम्मीद में आते हैं। मषीनों के खराब होने की वजह से बाहर की कंपनी से उनकी मदद लेनी पड़ती है। जो काफी खर्चीला होता है, और गुणवत्ता पर भी संदेह रहता है।

KGMU Prosthodontics Department
KGMU Prosthodontics Department

इस विभाग में मौजूदा समय 3 सिरेमिक मशीन, 2 कास्टिंग मशीन, 2 सैंड बालस्टर, 1 अल्ट्रासोनिक, 9 लैब माइक्रोमोटर सालों से खराब पड़े हैं। अस्पताल प्रशासन को कई बार इस संबध में पत्राचार किया गया, पर नतीजा सिफर निकला। सबसे खास बात यह है कि इन मशीनों को चलाने वाले 12 अनुभवी दंत मैकेनिक खाली बैठे हैं।

सूत्रों की बात माने तो सारा खेल कमीशन का है, जिससे बाहर की लैब वालों का दंत विभाग में खासा दखल रहता है।

विभाग के कर्मचारी की माने तो इन्हीं मशीनों की मदद से पहले 150 से 200 दांत बनाये जाते थे, जिससे केजीएमयू को भी राजस्व के लाखों रूपये प्राप्त होते थे। वहीं इस संबध में प्रवक्ता डा. केके सिंह को कई बार फोन करने के बाद भी फोन नहीं उठा।

Bhawana Rawat

भावना रावत पिछले 2 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, विदेश, क्राइम की खबरें लिखने में रुचि है। दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं।