Representative of Rahbar-e-Muazzam: रिप्रेजेंनटेटिव ऑफ रहबर-ए-मुजज्जम ईरान कल्चर हाउस (नई दिल्ली) डॉ. अब्दुल माजिद हकीम इलाही ने प्रयागराज में दरियाबाद स्थित कार्यक्रम में शामिल होने के दौरान अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा, “मुझे यहां बुलाने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। दरअसल, मुझे भारत के विभिन्न हिस्सों में अपने भाइयों और बहनों से मिलना बहुत पसंद है। यहां के भाइयों और बहनों से मिलने के लिए मुझे काफी समय पहले आमंत्रित किया गया था।
रमजान के अवसर पर एक सेमिनार आयोजित किया गया है और हम रमजान की फजीलतों (महत्व) के बारे में बात करने जा रहे हैं। मुझे इस सेमिनार में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया था। यही यहां मेरी मौजूदगी का मकसद है।” इसके साथ ही उन्होंने भारत को अपने पुराना मित्र देश भी बताया।
रहबर-ए-मुजज्जम के रिप्रेजेंनटेटिव से खास बातचीत

ईरान के नए सर्वोच्च नेता, अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई के व्यक्तित्व और दृष्टिकोण का वर्णन करते हुए कहा कि अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई सर्वोच्च नेता के बेटे हैं। लेकिन उन्हें इस वजह से नहीं चुना गया। उन्हें उनकी योग्यताओं के कारण चुना गया है। वैज्ञानिक मामलों में, वह बहुत होशियार हैं। प्रबंधन में, वह एक बहुत अच्छे प्रबंधक हैं और उनके पास बहुत अनुभव है। जहां तक उनके व्यक्तिगत जीवन की बात है, वह एक बहुत ही धर्मपरायण व्यक्ति हैं।
उन्हें सरकार से कभी वेतन नहीं मिला। वह आज भी किराए के मकान में रहते हैं और उनके पास न अपना घर है, न कार और न ही बैंक खाता। कभी-कभी उन्हें दूध या ब्रेड खरीदने के लिए हमसे पैसे उधार लेने पड़ते थे। वह बहुत स्मार्ट और विचारधारा, दर्शन और प्रबंधन के प्रवर्तक हैं।
ईरान के सुप्रीम लीडर रहे सैयद आयतुल्ला अली खामनेई का जिक्र करत हुए उन्होंने कहा कि मैं उनकी शहादत से पहले उनसे मिला था और मैंने उन्हें बताया कि भारत में हमारे सभी भाई-बहन, जिनसे मैं मिला हूं, वे आपको ‘सलाम’ भेज रहे हैं। उनका सलाम उन तक पहुंचाकर मुझे बहुत खुशी हुई। वह बहुत खुश हुए और भारत के विद्वानों, दार्शनिकों और कुछ गणमान्य व्यक्तियों और हस्तियों के बारे में पूछने लगे। अंत में उन्होंने कहा, ‘कृपया उन्हें मेरा सलाम कहें, और उन्हें बताएं कि मैं हर समय, हर रात उनके लिए दुआ करता हूं। मैं उनसे प्यार करता हूं।
भारत को बताया अपना पुराना मित्र देश
भारत को अपना पुराना मित्र देश बताया। भारत के युवाओं के लिए, खास तौर पर जो मेडिकल और टेक्निकल फील्ड में हैं, इस बात की अहमियत पर उन्होंने कहा कि हमारी समझ के मुताबिक और पाक कुरान और रिवायतों के हिसाब से इंसान की सबसे बड़ी खूबी ‘इल्म’ (नॉलेज) और ‘साइंस’ ही है। हमें शिक्षा हासिल करने के रास्ते पर चलना चाहिए, क्योंकि शिक्षा के बिना हम इंसानियत के उस ऊंचे मुकाम तक नहीं पहुंच सकते।
हमें इल्म हासिल करना है ताकि हम तरक्की कर सकें और अपने देश को आगे बढ़ा सकें। अपने इल्म के ज़रिए हमें अपने दोस्तों, अपने देश के लोगों और यहां तक कि पूरी दुनिया के लिए नए मौके पैदा करने चाहिए। इल्म हासिल करके ही हम दूसरों की मदद कर सकते हैं। आज ईरान में जितनी भी तरक्की और कामयाबियां दिख रही हैं, वो सब हमारे युवाओं की वजह से ही मुमकिन हो पाई हैं।


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