RPN ने चुनावी मजधार में छोड़ा कांग्रेस का साथ, सोनिया को भेजा इस्तीफा, बोले- नए अध्याय की शुरुआत

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पूर्व केंद्रीय मंत्री आरपीएन सिंह ने उत्तर प्रदेश चुनाव से कुछ हफ्ते पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में जाने की खबरों के बीच आज कांग्रेस से इस्तीफा देकर पार्टी का साथ छोड़ दिया है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री आरपीएन सिंह ने उत्तर प्रदेश चुनाव से कुछ हफ्ते पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में जाने की खबरों के बीच आज कांग्रेस से इस्तीफा देकर पार्टी का साथ छोड़ दिया है। आरपीएन सिंह पूर्वी यूपी के कुशीनाहर से आते हैं, वह उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के सबसे बड़े नेताओं और उसके झारखंड प्रभारी थे। उन्होंने सोनिया गांधी को संबोधित अपना इस्तीफा ट्विटर पर पोस्ट कर इस बात की जानकारी दी। बता दें कि ऐसे कयास लगाए जारहे हैं कि आरपीएन सिंह आज ही भाजपा में शामिल हो सकते हैं।
आरपीएन सिंह ने दिया कांग्रेस से इस्तीफा 
आरपीएन सिंह ने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखे अपने संक्षिप्त पत्र को ट्विटर पर साझा करते हुए लिखा, “आज हम सभी देशवासी गणतंत्र दिवस का जश्न मना रहे हैं, मैं अपनी राजनीतिक यात्रा में एक नया अध्याय शुरू करता हूं। जय हिंद।” उन्होंने इस्तीफे में पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देते हुए कहा है, ‘‘मैं राष्ट्र, लोगों और पार्टी की सेवा करने का अवसर प्रदान करने के लिए आपका (सोनिया का) धन्यवाद करता हूं।’’ मीडिया रिपोर्टों से पता चलता है कि आरपीएन सिंह अपने गढ़ पडरौना में भाजपा के उम्मीदवार के रूप में स्वामी प्रसाद मौर्य के विपरीत चुनाव लड़ सकते हैं, जिन्होंने हाल ही में भाजपा छोड़ दी थी।

स्वामी प्रसाद मौर्य की बढ़ सकती है चुनौती 
आरपीएन सिंह तीन बार पडरौना से विधायक रहे हैं। वह 2009 में एक सांसद के रूप में चुने गए लेकिन 2014 में हार गए। स्वामी प्रसाद मौर्य ने पिछले दो राज्य चुनावों में पडरौना सीट से जीत हासिल की, पहले बसपा उम्मीदवार के रूप में और फिर भाजपा के उम्मीदवार के रूप में। इससे पहले आज आरपीएन सिंह ने अपने ट्विटर बायो को बदल दिया और बड़े पैमाने पर अटकलों को हवा देते हुए “कांग्रेस” को छोड़ दिया। 
कांग्रेस ने खोया पार्टी का एक और बड़ा चेहरा 
जितिन प्रसाद के पिछले साल पद छोड़ने के बाद उत्तर प्रदेश में कांग्रेस से यह दूसरा बड़ा निकास है। जीतन प्रसाद के बाद राहुल गांधी के करीबी आरपीएन सिंह भाजपा में शामिल होने जा रहे हैं। कांग्रेस ने पिछले दो साल में कई बड़े नेताओं को खोया है। 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया का झटका पार्टी में एक बड़े मंथन के लिए ट्रिगर्स में से था, जिसके कारण 23 नेताओं ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर “दृश्यमान और पूर्णकालिक” नेतृत्व और सामूहिक निर्णय लेने के लिए कहा।

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