Baba Ramdev Appeal to Kanwariyas: देश में 30 जुलाई से सावन का पवित्र महीना चल रहा है। इस दौरान अलग-अलग राज्यों से लाखों कांवड़िए हरिद्वार, नीलकंठ और अन्य तीर्थ स्थलों से गंगाजल लेकर अपने-अपने शिवालयों की ओर बढ़ रहे हैं। इसी बीच योगगुरु स्वामी रामदेव ने हरिद्वार स्थित पतंजलि योगपीठ पहुंचे। जहां उन्होंने आचार्य बालकृष्ण के जन्मदिवस पर आयोजित ‘जड़ी-बूटी दिवस’ कार्यक्रम में कांवड़ यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं को महत्वपूर्ण संदेश देते हुए अपील की। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की सच्ची आराधना केवल जल चढ़ाने से पूरी नहीं होती, बल्कि जीवन में संयम, अनुशासन और अच्छे आचरण को अपनाना भी उतना ही जरूरी है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, स्वामी रामदेव ने कहा कि कांवड़ यात्रा भगवान शिव की भक्ति और आत्मशुद्धि का त्योहार है। ऐसे में किसी भी शिवभक्त को शराब, बीड़ी, सिगरेट, गुटखा, हुक्का, भांग, गांजा, सुल्फा या धतूरा जैसे किसी भी नशे का सेवन नहीं करना चाहिए। उनका कहना था कि धार्मिक आस्था के नाम पर नशे को सही ठहराना सही नहीं है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि यात्रा के दौरान अपने शरीर और मन दोनों को शुद्ध रखें। उनका मानना है कि शिवभक्ति का असली स्वरूप आत्मसंयम और सात्विक जीवन में दिखाई देता है।
भगवान शिव की परंपराओं को सही तरीके से समझने की जरूरत
इसके साथ ही योगगुरु ने आगे कहा कि कई लोग भगवान शिव से जुड़ी कुछ परंपराओं का गलत अर्थ निकाल लेते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भांग, गांजा या धतूरा चढ़ाने की परंपरा का अपना धार्मिक और प्रतीकात्मक महत्व हो सकता है, लेकिन इसे स्वयं नशा के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि धर्म का उद्देश्य व्यक्ति को बेहतर बनाना है, इसलिए किसी भी परंपरा को समझदारी और सही संदर्भ में अपनाना चाहिए।
स्वामी रामदेव ने कांवड़ यात्रा के दौरान होने वाली कुछ अप्रिय घटनाओं पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भगवान शिव के भक्त कभी हिंसा, मारपीट या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का रास्ता नहीं अपनाते। अगर कोई व्यक्ति धार्मिक यात्रा के दौरान कानून तोड़ता है या दूसरों को नुकसान पहुंचाता है, तो यह शिवभक्ति की भावना के अलग है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि पूरी यात्रा के दौरान अनुशासन बनाए रखें, दूसरों का सम्मान करें और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी यात्रा पूरी करें।
समाज में सद्भाव और आत्मसंयम जरूरी
हरिद्वार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान स्वामी रामदेव ने कहा कि समाज को मजबूत बनाने के लिए जाति, धर्म और राजनीति के नाम पर फैलने वाले उन्माद से बचना जरूरी है। वहीं किसी भी प्रकार की कट्टरता या वैमनस्य समाज को कमजोर करता है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के अंदर अच्छे संस्कार, सेवा का भाव और आत्मनियंत्रण होना चाहिए। यही भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की सबसे बड़ी पहचान है। स्वामी रामदेव ने मां गंगा के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। श्रद्धालुओं को गंगा स्नान करना चाहिए, गंगाजल लेकर भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए और इस पूरी यात्रा को आत्मिक शुद्धि का अवसर मानना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा का उद्देश्य केवल पैदल चलना नहीं, बल्कि अपने अंदर धैर्य, अनुशासन और सकारात्मक सोच बढ़ाना है। वहीं मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि सच्ची शिवभक्ति वही है, जिसमें व्यक्ति अपने जीवन से नशा, हिंसा और बुराइयों को दूर रखकर सेवा, सदाचार और आत्मसंयम का मार्ग अपनाए।



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