Holashtak ke 8 Din Grah Prabhav: आज यानी 24 फरवरी 2026, मंगलवार से होलाष्टक शुरू हो गया है। सुबह 7:01 बजे जैसे ही फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि लगी, वैसे ही ‘होलाष्टक’ का आगाज हो गया। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, आज से लेकर होलिका दहन तक के ये 8 दिन बेहद ‘भारी’ माने जाते हैं। अगर आप कोई नया या शुभ काम शुरू करने की सोच रहे हैं, तो ये समय शुभ नहीं माना जाता है। क्योंकि इन 8 दिनों में शुभ कार्यों पर पूरी तरह पाबंदी लग जाती है। आइए जानते हैं कि आखिर इन दिनों में क्या-क्या करने की मनाही है और Holashtak me Kaunsa Grah Prabhav Dalega।
Holashtak ke 8 Din Grah Prabhav: होलाष्टक में क्या नहीं करना चाहिए ?

- माना जाता है कि होलाष्टक के दौरान भूलकर भी सगाई, नामकरण, विवाह, मुंडन आदि 16 संस्कार नहीं करने चाहिए, क्योंकि इस दौरान किसी भी प्रकार के शुभ कार्यों की मनाही होती है।
- इन 8 दिनों की अवधि में नया वाहन, प्रॉपर्टी, मकान आदि खरीदने से भी बचना चाहिए। होलाष्टक के दौरान इस कार्यों को करना शुभ नहीं माना जाता है।
होलाष्टक के दौरान ग्रह उग्र रहते हैं। ऐसे में इस दौरान नया बिजनेस भी शुरू नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से ग्रहों की उग्रता का प्रभाव आपके काम पर पड़ सकता है। - अगर घर बनवाने की सोच रहे हैं, तो होलिका दहन तक ऐसा बिल्कुल न करें। मान्यता है कि होलाष्टक के दौरान नए मकान का निर्माण और गृह प्रवेश नहीं करना चाहिए।
- ज्योतिष मान्यता है कि होलाष्टक के दौरान नौकरी बदलने से भी बचना चाहिए। कहीं नई जगह होलाष्टक से पहले या बाद में जाना चाहिए। लेकिन अगर नौकरी बदलना आवश्यक हो तो अपनी कुंडली किसी कुशल ज्योतिषी को दिखाकर सलाह लेनी चाहिए।
- होलाष्टक के दौरान हवन और यज्ञ जैसे कार्य करना या करवाना भी वर्जित माना गया है। ऐसा करने से प्रतिकूल प्रभावों का सामना करना पड़ सकता है।
Holashtak Day Wise Grah: होलाष्टक में क्या करना चाहिए?

- इन 8 दिनों के दौरान जप, तप और ध्यान करना बेहद अच्छा माना जाता है। इससे जातक के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं। ऐसे में होलाष्टक में भगवान की विधिपूर्वक पूजा और ध्यान करना चाहिए।
- मन जाता है कि इन दिनों भक्त प्रहलाद में विष्णुजी के लिए अटूट भक्ति थी। ऐसे में आप होलाष्टक के दौरान भगवान विष्णु की पूजा करने के साथ-साथ उनके मंत्र ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ का जाप कर सकते हैं।
- होलाष्टक के दौरान शिवजी की आराधना करने का भी खास महत्व है। इससे भक्तों पर भोलेनाथ की कृपा बनी रह सकती है। आप ‘ओम नमः शिवाय’ मंत्र का जाप कर सकते हैं।
- इन 8 दिनों में उग्र ग्रहों की शांति के लिए ज्योतिषी की सलाह लेकर उपाय कर सकते हैं। इससे जीवन से नकारात्मकता दूर होती है और सकारात्मकता बढ़ने लगती है।
Holashtak me Surya Chandra ka Asar: किस दिन कौनसा ग्रह देगा अशुभ फल?

ग्रहों की इस उग्रता का असर मन, बुद्धि, एकाग्रता, निर्णय क्षमता आदि पर पड़ता है, साथ ही कामों में बाधा आती है। लोग भ्रम में रहते हैं, सही फैसले नहीं ले पाते हैं। जानिए किस दिन कौनसा ग्रह उग्र रहता है।
1. अष्टमी (चंद्रमा): इससे मानसिक अशांति रहती है और भ्रम के कारण गलत निर्णय लेने की आशंका रहती है।
2. नवमी (सूर्य): सूर्य की उग्रता अहंकार और टकराव बढ़ाती है। खासतौर पर पिता-पुत्र के बीच तनाव ला सकती है।
3. दशमी (शनि): शनि की उग्रता कामों में देरी करती है, साथ ही रुकावटें पैदा करती है। लोगों में आलस्य हावी रह सकता है।
4. एकादशी (शुक्र): शुक्र प्रेम-विलासिता के कारक ग्रह हैं। शुक्र की उग्रता वैवाहिक जीवन में कलह पैदा करती है और भौतिक सुखों में कमी का कारण बनती है।
5. द्वादशी (गुरु): देवगुरु बृहस्पति भाग्य, सुख, ज्ञान और वैभव के कारक हैं। गुरु की उग्रता भाग्य में कमी करती है।


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