शिवाजी बहुत बुद्धिमान थे और उन्हे यह कतई मंजूर नहीं था की लोग जात पात के झगड़ों में उलझे रहे। वह किसी भी धर्म के खिलाफ नही थे
उन्होंने एक शक्तिशाली नौसेना का निर्माण किया था। इसलिए उन्हें भारतीय नौसेना के पिता के रूप में जाना जाता है
शिवाजी युद्ध की रणनीति बनाने में माहिर थे और सीमित संसाधनों के होने के बावजूद छापेमारी युद्ध कौशल का परिचय उन्होने तब दिया जब बहुत ही कम उम्र मात्र 15 साल में ‘तोरना’ किले पर कब्जा करके बीजापुर के सुल्तान को पहला तगड़ा झटका दिया था
क्या आप जानते है कि बीजापुर को जीतने के लिए शिवाजी ने औरंगजेब की सहायता के लिए हाथ आगे भड़ाया था। पर ऐसा हो ना सका क्योंकि अहमदनगर के पास मुगल क्षेत्र में दो अधिकारियों ने छापा मार दिया था
वह शिवाजी थे, जिन्होंने मराठों की एक पेशेवर सेना का गठन किया। इससे पहले मराठों की कोई अपनी सेना नही थी
वह महिलाओं के सम्मान के कट्टर समर्थक थे। शिवाजी ने महिलाओं के खिलाफ दृढ़ता से उन पर हुई हिंसा या उत्पीड़न का विरोध किया था
पन्हाला किले की घेराबंदी से भागने में शिवाजी कामियाब हुए थे।
वह गुरिल्ला युद्ध के प्रस्तावक थे। उनको पहाडों का चूहा कहा जाता था क्योंकि वह अपने इलाके की भूगोलिक,गुरिल्ला रणनीति या गनिमी कावा जैसे की छापा मरना, छोटे समूहों के साथ दुश्मनो पे हमला करना आदि अच्छी तरह से वाकिफ थे
उनकी खासियत थी की वह अपने राज्य के लिए बादमें लड़ते थे पहले भारत के लिए लड़ते थे


Download Android App
Download iOS App













