आश्विन मास के शुुक्ल पक्ष में सोम प्रदोष व्रत आता है जो इस साल 28 सितंबर सोमवार यानी आज मनाया जा रहा है। यह व्रत सोमवार को आता है इस वजह से सोम प्रदोश व्रत के नाम से भी इसे जाना जाता है। हिंदू धर्म में एकादशी के व्रत का जितना महत्व बताया गया है उतना ही महत्व इस व्रत का भी है।

भगवान शिव जी और माता पार्वती की पूजा इस दिन करते हैं। मान्यताओं के अनुसार भोलेनाथ का आर्शीवाद उस व्यक्ति को मिलता है जो यह प्रदोष व्रत करता है। चलिए हम आपको सोम प्रदोष व्रत की पूजा की विधि और इसके महत्व के बारे में बताते हैं।
ये है सोम प्रदोष के व्रत का महत्व
शिवशंकर की कृपा और उन्हें प्रसन्न करने के लिए भक्त सोम प्रदोष व्रत रखते हैं। हमेशा अपने भक्तों पर शिवजी यह व्रत करने से आर्शीवाद बनाए रखते हैं। हिंदू धर्म में शिवजी की पूजा अर्चना का दिन सोमवार बताया गया है। मंदिर में जाकर दूध शिवलिंग पर इस दिन अर्पित करते हैं।

इतना ही नहीं पूरे विधिपूर्वक शिवजी की पूजा करते हैं। साथ ही माता पार्वती की पूजा भी इस दिन करने का विधान है। भक्तों पर हमेशा शिवजी और माता पार्वती का आर्शीवाद बना रहता है। मान्तयाओं के अनुसार जो व्यक्ति यह व्रत करता है उसके रोग दूर हो जाते हैं।
ये है पूूजन विधि सोम प्रदोष व्रत की
1. सुबह जल्दी उठकर इस दिन स्नान करके स्वच्छ वस्त्र वर्ती को पहनने चाहिए।
2. फिर प्रदोष व्रत का संकल्प अपने हाथ में जल लेकर वर्ती करें।
3. इस व्रत में व्यक्ति को फलाहार पूरे दिन करना होता है। उसके बाद भगवान शिव जी की पूजा शाम के समय प्रदोष काल के शुभ मुहूर्त में करनी चाहिए।

4. उसके बाद गंगा जल,अक्षत, पुष्प,धतूरा, धूप,फल,चंदन,गाय का दूध,भांग आदि भोलेनाथ को चढ़ाएं।
5. ओम नमः शिवायः के मंत्र का जप इसके बाद वर्ती करें।
6. फिर व्यक्ति शिव चालीसा का पाठ पढ़ें और आरती करें।

7. उसके बाद भोग को प्रसाद के तौर पर सारे घरवालों में पूजा संपन्न होने के बाद बांट दें।
8. इस दिन जागरण पूरी रात करना चाहिए और फिर महादेव की पूजा स्नान अगले दिन स्नान आदि करके करें।
9. फिर ब्राह्मण को दान-दक्षिणा अपने सामर्थ्य के अनुसार दें।
10. इसके बाद अपना व्रत पारण को पूरा कर लें।


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