15वें आसियान शिखर सम्मेलन और 12वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाग लेने फिलीपींस पहुंच चुके हैं। फिलीपींस में प्रधानमंत्री भारतीय समुदाय से भी मुलाकात करेंगे। इस दौरान उनकी मुलाकात फिलीपींस के राष्ट्रपति रोड्रिगो डूटार्टे से भी होगी।
इसके अलावा प्रधानमंत्री इंटरनेशनल राइस इंस्टिट्यूट (आईआरआरआई) का भी दौरा करेंगे जहां कई भारतीय काम करते हैं।
आपको बता दे कि अपनी इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री आतंकवाद और उग्रवाद की बढ़ती चुनौतियों से निपटने के लिये एक वैश्विक दृष्टिकोण तय किए जाने की भारत की मांग दोहराने के साथ क्षेत्रीय व्यापार बढ़ने के लिये कदम उठाने पर जोर दे सकते हैं।
यहां राजनयिकों ने बताया कि मंगलवार को आसियान शिखर सम्मेलन के दौरान विवादास्पद दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में चीनी की आक्रामक सैन्य गतिविधियों, उथर कोरिया के परमाणु मिसाइल परीक्षणों और क्षेत्रीय सुरक्षा परिवेश जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होगी।
बता दे कि यहां पर उनकी मुलाकात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हुई है। वही जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे, आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री मैकोल्म टर्नबुल और रूस के प्रधानमंत्री दमित्री मेदवेदेव और कुछ अन्य देशों के नेताओं के साथ अलग से द्विपक्षीय मुलाकातें कर सकते हैं।
#FLASH PM Narendra Modi meets US President Donald Trump in Manila #ASEANSummit pic.twitter.com/HofsRTZOip
— ANI (@ANI) November 12, 2017
दस प्रमुख देशों का संगठन दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन (आसियान) की बैठक में भाग लेने के लिये म्यांमा की नेता आंग सान सू की, कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन सेन, मलेशिया के प्रधानमंत्री नजीब रज्जाक, सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सिएन लूंग और न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जे आरडेर्न पहले ही यहां में पहुंच चुके हैं।
फिलीपीन में भारत के राजदूत जयदीप मजूमदार ने से कहा कि आसियान का प्रत्येक देश चाहता है कि भारत हर संभव तरीके से क्षेत्र से जुड़। यह एक वास्तविक गठजोड़ है। अमेरिका, फ्रांस और जापान रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण भारत-प्रशांत क्षेत्र (इंडो-पैसेफिक रिजन) में भारत की बड़ भूमिका की वकालत करते रहे हैं। चीन इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ने का प्रयास कर रहा है।
मजूमदार ने कहा कि आतंकवाद एक प्रमुख मुद्दा है जिसपर न केवल आसियान शिखर सम्मेलन में बल्कि पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में भी चर्चा होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के लिये धन के प्रवाह पर रोक आतंकवाद पर शिकंजा कसने के मकसद से सम्मेलन में कुछ प्रस्ताव पारित किए जा सकते हैं।
आसियान शिखर सम्मेलन में व्यापार और निवेश संबंधित मुद्दों पर अधिक जोर दिये जाने की संभावना है। पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में नेताओं के समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद, अप्रसार और पलायन जैसे मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श होगा।
दस आसियान सदस्य देशों के अलावा पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में भारत, चीन, जापान, कोरिया गणराज्य, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड तथा अमेरिका और रूस शामिल हो रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी आसियान-भारत तथा पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलनों को मंगलवार को संबोधित करेंगे। वह आसियान की 50वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में भी भाग लेंगे।
भारत समेतआसियान क्षेत्र की कुल आबादी 1.85 अरब है जो वैश्विक आबादी का एक चौथाई हिस्सा है। क्षेत्र का सकल जीडीपी 3800 अरब डालर से अधिक का है।
पिछले 17 साल में आसियान से भारत में 70 अरब डालर का निवेश आया जो कुल एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश ) का 17 प्रतिशत है। वहीं भारत का आसियन में निवेश इसी अवधि में 40 अरब डालर से अधिक है।
कट्टरता से मुकाबला करने के लिये अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने के भारत के प्रस्ताव पर भी चर्चा होने की संभावना है। भारत इसके लिये तारीख तय करना चाहता है।
प्रधानमंत्री आसियान व्यापार और निवेश शिखर सम्मेलन के साथ-साथ क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) के नेताओं की बैठक में भी भाग लेंगे।
आरसीईपी में 10 सदस्यीय आसियान के अलावा भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं। यह समूह मुक्त व्यापार समझौते के लिये बातचीत कर रहा है।
फिलीपीन की अपनी पहली यात्रा के दौरान मोदी भारतीय समुदाय द्वारा आयोजित स्वागत समारोह में शामिल होंगे और अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (आईआरआरआई) तथा महावीर फिलिपीन फाउंडेशन भी जाएंगे।


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