वाशिंगटन, 4 नवंबर (आईएएनएस)। भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद सुहास सुब्रमण्यम मंगलवार को वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से दूसरी बार अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए चुने गए। तमिल मूल के चिकित्सक माता-पिता के बेटे सुहास की मां बेंगलुरु से हैं, जबकि उनके पिता चेन्नई और सिकंदराबाद में पले-बढ़े हैं।
भारत से पारिवारिक जुड़ाव और अमेरिका में भारतीय समुदाय के मुद्दों पर मुखरता उनकी राजनीतिक पहचान का अहम हिस्सा रहे हैं।
सुब्रमण्यम ने अपनी जीत के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “चुनाव प्रचार खत्म हो गया है, लेकिन असली काम अब शुरू हो रहा है। मैं वाशिंगटन में बदलाव लाने के लिए अपने समुदाय के साथ मिलकर काम करने को तत्पर हूं।”
पिछले साल एक साक्षात्कार में उन्होंने अपने भारतीय पारिवारिक संबंधों का जिक्र करते हुए कहा था, “मेरी मां बेंगलुरु से हैं। मेरे पिता चेन्नई और सिकंदराबाद से हैं और भारत से हमारा जुड़ाव है। मेरे परिवार के लोग आज भी भारत में रहते हैं।”
उन्होंने अपनी मां के अमेरिका पहुंचने की कहानी भी साझा की थी। उनकी मां 1979 में डलेस हवाई अड्डे पर पहुंची थीं। सुब्रमण्यम ने इस घटना को उस इलाके के इतिहास और प्रवासी समुदाय के अनुभवों से जोड़ते हुए सीएनबीसी-टीवी18 से कहा था, “यहां डलेस हवाई अड्डा है और हमारा जिला उनके लिए एलिस आइलैंड जैसा था।”
ह्यूस्टन, टेक्सास में 1986 में जन्मे सुब्रमण्यम ने टुलेन विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र की पढ़ाई की और नॉर्थवेस्टर्न विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री हासिल की। उन्होंने अमेरिकी प्रतिनिधि सुजैन कोस्मास के सहयोगी के रूप में काम किया। इसके बाद सीनेटर डिक डर्बिन की सीनेट न्यायपालिका समिति में क्लर्क के तौर पर काम किया, जहां वह ड्रीम एक्ट से जुड़े कामकाज में शामिल रहे।
वर्ष 2015 में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में उन्होंने व्हाइट हाउस में प्रौद्योगिकी नीति सलाहकार के रूप में भी सेवाएं दीं। उनके चुनाव प्रचार अभियान के अनुसार, वह वकील के तौर पर काम करने के साथ एक छोटा प्रौद्योगिकी कारोबार भी चला चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने आपातकालीन चिकित्सा तकनीशियन और अग्निशमनकर्मी के रूप में स्वयंसेवा भी की है।
सुब्रमण्यम ने 2019 में वर्जीनिया जनरल असेंबली का चुनाव जीतकर इतिहास रचा था। वह इस सदन के लिए निर्वाचित होने वाले पहले भारतीय-अमेरिकी, पहले दक्षिण एशियाई मूल के व्यक्ति और पहले हिंदू थे। उन्होंने 2020 से 2024 तक वर्जीनिया हाउस ऑफ डेलीगेट्स में सेवा दी और इसके बाद कुछ समय के लिए वर्जीनिया सीनेट के सदस्य भी रहे।
वर्ष 2024 में उन्होंने जेनिफर वेस्टन की खाली हुई सीट जीतकर अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में प्रवेश किया था।
कांग्रेस में सुब्रमण्यम की भूमिका कई अहम समितियों में है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की वेबसाइट के अनुसार, वह निगरानी समिति के सदस्य हैं और इसकी सैन्य एवं विदेश मामलों से जुड़ी उपसमिति में विपक्ष के वरिष्ठ सदस्य (रैंकिंग मेंबर) हैं। इसके अलावा वह साइबर सुरक्षा एवं सूचना प्रौद्योगिकी पैनल, विज्ञान, अंतरिक्ष एवं प्रौद्योगिकी समिति और आचार समिति में भी शामिल हैं।
भारतीय-अमेरिकी समुदाय से जुड़े मुद्दों पर सुब्रमण्यम लगातार आवाज उठाते रहे हैं। खासतौर पर एच-1बी वीजा धारकों की परेशानियों को लेकर उनका रुख चर्चा में रहा है। वह ‘डोमेस्टिक वीजा रिन्यूअल मॉडर्नाइजेशन एक्ट’ का समर्थन करते हैं। यह तीन विधेयकों के एक प्रस्तावित पैकेज का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य एच-1बी, एल, ओ और अन्य श्रेणियों के वीजा धारकों को अमेरिका के भीतर ही अपने वीजा का नवीनीकरण कराने की सुविधा देना है।
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से नए एच-1बी वीजा आवेदनों पर एक लाख डॉलर का शुल्क लगाए जाने के फैसले की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा था, “यह आव्रजन नीति नहीं है। यह आर्थिक तोड़फोड़ है।”
अक्टूबर 2025 में उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लटनिक को भेजे गए एक पत्र पर भी हस्ताक्षर किए थे। इसमें एच-1बी वीजा से जुड़े नए आदेश को लेकर चिंता जताई गई थी।
भारत के प्रति ट्रंप प्रशासन की शुल्क नीति की भी उन्होंने आलोचना की है। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था, “शुल्क अमेरिकी लोगों पर लगाया जाने वाला एक कर है।” उन्होंने आगे कहा, “मुझे लगता है कि ट्रंप ने भारत के साथ संबंधों को ठीक तरह से नहीं संभाला है। भारत एक स्वाभाविक सहयोगी है।”
सुब्रमण्यम ने यह भी कहा था कि उनका मानना है कि भारतीय-अमेरिकियों का बहुमत अब भी डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि भारत पर शुल्क लगाने से भारतीय-अमेरिकियों के बीच ट्रंप की लोकप्रियता बढ़ने के बजाय प्रभावित हो सकती है।
वीजा और भारत से जुड़े मुद्दों के अलावा सुब्रमण्यम तकनीकी क्षेत्र के नियमन पर भी जोर देते रहे हैं। उन्होंने ‘रिस्पॉन्सिबल डेटा सेंटर साइटिंग एक्ट’ पेश किया है। इस विधेयक का उद्देश्य डेटा सेंटर स्थापित करने से जुड़े मामलों में उचित नियम और सुरक्षा मानक तय करना है। उन्होंने एक्स पर लिखा था, “कांग्रेस को डेटा सेंटरों के लिए उचित नियामकीय सीमाएं तय करनी चाहिए।”
अपने चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में उन्होंने वर्जीनिया के सीनेटर टिम केन और मार्क वार्नर के साथ एक रैली की थी।
सुब्रमण्यम अपनी पत्नी मिरांडा पेना सुब्रमण्यम और दो बेटियों के साथ लाउडन काउंटी में रहते हैं।
–आईएएनएस
केआर/
(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)


Download Android App
Download iOS App



