भारत डरेगा नहीं, रूस पर प्रतिबंध मामले में विदेश मंत्रालय अमेरिकी राजदूत को करे तलब: पूर्व राजनयिक

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नई दिल्ली, 19 सितंबर (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून पर हस्ताक्षर के बाद, पूर्व राजनयिक के.पी. फैबियन ने शनिवार को कहा कि यह नया कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों पर टैरिफ लगाने का अधिकार देता है जो रूस से गैस और तेल आयात करते हैं। उनका ये बयान अमेरिकी कांग्रेस की ओर से पास किए गए कानून के बाद आया है। ये राष्ट्रपति ट्रंप को रूस से बड़े पैमाने पर तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार (स्थानीय समय) को…

नई दिल्ली, 19 सितंबर (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून पर हस्ताक्षर के बाद, पूर्व राजनयिक के.पी. फैबियन ने शनिवार को कहा कि यह नया कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों पर टैरिफ लगाने का अधिकार देता है जो रूस से गैस और तेल आयात करते हैं।

उनका ये बयान अमेरिकी कांग्रेस की ओर से पास किए गए कानून के बाद आया है। ये राष्ट्रपति ट्रंप को रूस से बड़े पैमाने पर तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का अधिकार देता है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार (स्थानीय समय) को रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाले बिल पर साइन करके उसे कानून बना दिया। इससे उनके प्रशासन को उन देशों पर आर्थिक दबाव डालने का एक और तरीका मिल गया जो रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीद रहे थे।

आईएएनएस से ​​बात करते हुए फैबियन ने कहा, “इससे राष्ट्रपति को अपनी मर्जी से फैसला लेने की छूट मिलती है। वहीं, अगर उन्हें लगता है कि किसी खास देश पर ज्यादा टैरिफ लगाने से अमेरिकी हित प्रभावित होंगे, तो वे इन्हें न लगाने का फैसला कर सकते हैं। ऐसे में उनके पास कई विकल्प मौजूद हैं।”

उन्होंने कहा, “रूसी सामान का आयात करने वाले शीर्ष पांच देशों को निशाना बनाया जा रहा है। रूस से चीन 50% आयात करता है, भारत 37%, तुर्की 5%, यूरोपीय संघ 5%, और फिर अजरबैजान और हंगरी का हिस्सा है। ये दोनों मिलकर 3% खरीदते हैं।”

यह कानून राष्ट्रपति ट्रंप को रूसी तेल या गैस खरीदने वाले पांच सबसे बड़े देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है, हालांकि कानून में राष्ट्रपति को इन उपायों को लागू करने के बारे में अपनी मर्जी से फैसला लेने की गुंजाइश भी दी गई है।

खास तौर पर भारत के बारे में बात करते हुए फैबियन ने कहा कि उन्हें लगता है कि राष्ट्रपति ट्रंप दोनों देशों के बीच चल रही व्यापार बातचीत में टैरिफ के प्रावधान का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए कर सकते हैं।

उन्होंने कहा, “जहां तक ​​भारत की बात है, मेरा मानना ​​है कि ट्रंप के काम करने के तरीके को देखते हुए, वे भारत से अंतरिम व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करवाने के लिए इसे एक धमकी के तौर पर इस्तेमाल करेंगे। अब सवाल ये है कि भारत क्या प्रतिक्रिया देगा? मुझे नहीं लगता कि भारत डरेगा। विदेश मंत्रालय को इस मामले पर अमेरिकी राजदूत को तलब करना चाहिए।”

फैबियन ने रूसी एनर्जी के एक और बड़े आयातक, चीन, पर इस कानून के संभावित असर के बारे में भी बात की और राष्ट्रपति ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली संभावित बैठक का जिक्र किया।

फैबियन ने आगे कहा, “चीन के मामले में, राष्ट्रपति ट्रंप कुछ दिनों में अमेरिका में राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने वाले हैं, और खबर है कि वह एयरपोर्ट पर ही शी जिनपिंग से मिलेंगे। उन्होंने रात्रिभोज का भी इंतजाम किया है। मुझे नहीं लगता कि वह चीन पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की हिम्मत करेंगे। यह बात बिल्कुल साफ है। एक और बात यह है कि चीन भी जवाबी कार्रवाई कर सकता है। जब तक चीन को कोई भरोसा न मिले, शी जिनपिंग वहां क्यों जाएंगे और अपना समय क्यों बर्बाद करेंगे?”

हाउस ने बुधवार (स्थानीय समय) को 262-159 वोटों से ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ पास किया। सीनेट ने 7 अगस्त को इसे 86-11 वोटों से मंजूरी दी थी।

इस पैकेज का मकसद उन आर्थिक संसाधनों को कम करना है जिनसे यूक्रेन के खिलाफ रूस की जंग चल रही है। यह बिल रूसी अधिकारियों, बैंकों, ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े हितों और मास्को के सैन्य अभियानों में मदद करने वाली विदेशी संस्थाओं को निशाना बनाता है।

‘हाउस वेज एंड मीन्स कमेटी’ के मुताबिक, यह बिल रूसी सामानों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का निर्देश देता है। इसमें उन देशों के सामानों पर भी 100 प्रतिशत तक ड्यूटी लगाने का प्रावधान है जो रूस से तेल और गैस खरीदने से जुड़े नियमों के दायरे में आते हैं।

इन नियमों में रूस से एनर्जी इंपोर्ट करने वाले बड़े देश और तेल पर लगे प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले प्रमुख देश शामिल हैं। कमेटी ने कहा कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि हर 180 दिन में समीक्षा के बाद इसमें और देशों को भी शामिल कर सकते हैं।

–आईएएनएस

केआर/

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IANS Agency

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