क्वेटा, 24 जुलाई (आईएएनएस)। बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना की गोलीबारी में एक और व्यक्ति की मौत का मामला सामने आया है। स्थानीय मीडिया ने शुक्रवार को सूत्रों के हवाले से बताया कि बलूचिस्तान के खुजदार जिले में पाकिस्तानी सेना की गोलाबारी में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई और महिलाओं व बच्चों समेत कई अन्य घायल हो गए।
यह घटना खुजदार में वाध के ड्राखाला-गैसलाती इलाके में हुई। गोलीबारी के बाद वहां के लोगों ने हाईवे पर धरना दिया और मृतक अब्दुल कादिर का शव प्रदर्शन वाली जगह पर रख दिया।
द बलूचिस्तान पोस्ट के अनुसार, धरना-प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सेना की गोलाबारी गुरुवार सुबह शुरू हुई और वाध के एक आम इलाके में हुई।
प्रदर्शनकारियों ने घटना की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही की मांग की और स्पष्ट जांच होने तक धरना जारी रखने की कसम खाई।
घटना की निंदा करते हुए बलूच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) के चेयरमैन नसीम बलूच ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, “आम लोगों के इलाकों पर गोलाबारी, लोगों को जबरदस्ती गायब करना, बिना किसी कानूनी कार्रवाई के हत्याएं, हिरासत में मौतें और सामूहिक सजा, चल रहे संघर्ष की लगातार बनी हुई बातें बन गई हैं, जिससे स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की तुरंत जरूरत पर जोर पड़ता है।”
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संयुक्त राष्ट्र, स्वतंत्र मीडिया और मानवाधिकार संगठनों सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय को बलूचिस्तान में बिना किसी रोक-टोक के पहुंचने की अनुमति दी जानी चाहिए, ताकि वहां की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जा सके, मानवाधिकार हालात की निगरानी की जा सके और पारदर्शिता व जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
गुरुवार को मानवाधिकार संगठन बलोच वॉयस फॉर जस्टिस (बीवीजे) ने बलूचिस्तान के कई इलाकों, खांड कोटचा, जेहरी, नौशकी और जिवानी में पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा लंबे समय से लगाए गए कर्फ्यू, इंटरनेट बंदी और आवाजाही पर प्रतिबंध को लेकर गंभीर चिंता जताई। संगठन ने कहा कि ये कदम लाखों नागरिकों को सामूहिक सजा देने के समान हैं।
जारी बयान में बीवीजे ने कहा कि खांड कोटचा में अगली सूचना तक कर्फ्यू लागू करना मौलिक मानवाधिकारों और नागरिक स्वतंत्रताओं पर गंभीर हमला है।
संगठन ने बताया कि इससे पहले जेहरी, नौशकी और जिवानी में भी इसी तरह के कर्फ्यू लगाए गए थे, जिसके कारण लोग अपने घरों तक सीमित हो गए और सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ।
बीवीजे ने कहा, “लगातार कर्फ्यू के कारण दवाइयों, खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पा रहे हैं, छात्रों की पढ़ाई ठप हो गई है, और दिहाड़ी मजदूरों और छोटे कारोबारियों की आजीविका पर संकट आ गया है। साथ ही, व्यापार, परिवहन और संचार व्यवस्था पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ रहा है।”
इसमें कहा गया, “इन सामूहिक पाबंदियों के कारण महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और बीमारों को गंभीर मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, जो मानवीय गरिमा और मौलिक मानवाधिकारों के खिलाफ है।”
मानवाधिकार संस्था ने आगे कहा कि पाकिस्तान की फ्रंटियर कोर और दूसरे सुरक्षा बलों ने खांड कोच्चा इलाके में यात्री बसों पर अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें बेगुनाह नागरिकों की मौत हुई। यह बहुत चिंताजनक है।
घटना की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए बीवीजे ने कहा, “नागरिकों की जान और संपत्ति की सुरक्षा राज्य की बुनियादी संवैधानिक जिम्मेदारी है और ऐसी घटनाओं की पारदर्शी जांच के जरिए जिम्मेदार लोगों की पहचान की जानी चाहिए और उन्हें कानून के कटघरे में लाया जाना चाहिए।”
–आईएएनएस
केके/पीएम
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