क्वेटा में हजारा समुदाय पर हमला, दो लोगों की गोली मारकर हत्‍या, तीन घायल

क्वेटा, 14 अप्रैल (आईएएनएस)। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के क्वेटा शहर में हजारा समुदाय के कम से कम दो लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई, जबकि तीन अन्य घायल हो गए। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, कुछ अज्ञात हमलावरों ने लोगों पर फायरिंग की।

सीनियर पुलिस अधिकारी मुहम्मद खैर सुमलानी ने बताया कि यह हमला रविवार को हुआ, जब ये लोग हजारा टाउन से हजारगंज सब्जी मंडी से लौट रहे थे। पाकिस्तान के अखबार ‘डॉन’ के अनुसार, सुमलानी ने कहा, “मोटरसाइकिल पर सवार अज्ञात हथियारबंद लोगों ने उनकी गाड़ी पर फायरिंग कर दी, जिससे दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और तीन घायल हो गए।”

पुलिस अधिकारी ने कहा कि यह मामला टारगेट किलिंग जैसा लग रहा है। घटना की खबर मिलते ही पुलिस और सुरक्षा बल मौके पर पहुंच गए।

अभी तक किसी भी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। पुलिस हमलावरों को पकड़ने के लिए सर्च ऑपरेशन चला रही है।

इस घटना के विरोध में हजारा समुदाय के लोगों ने वेस्टर्न बाईपास को जाम कर दिया। ऐसी घटनाएं पहले भी हजारगंज इलाके में हो चुकी हैं, जहां सब्जी बेचने वालों पर हमले हुए हैं।

‘डॉन’ की रिपोर्ट के अनुसार, 2019 में भी क्वेटा के हजारगंज बाजार में एक धमाका हुआ था, जिसमें हजारा समुदाय को निशाना बनाया गया था। उस हमले में कम से कम 20 लोगों की मौत हुई थी और 48 लोग घायल हुए थे।

नेशनल कमीशन फॉर ह्यूमन राइट्स (एनसीएचआर) की 2018 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2012 से दिसंबर 2017 के बीच क्वेटा में हजारा समुदाय के 509 लोग मारे गए और 627 घायल हुए।

पिछले महीने आई एक रिपोर्ट में बताया गया कि सेना प्रमुख आसिम मुनीर के नेतृत्व में पाकिस्तान में सुन्नी कट्टरता तेजी से बढ़ी है, जिससे अहमदिया और शिया जैसे धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा बढ़ी है और उन्हें न्याय भी नहीं मिल पा रहा।

रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान की दो बड़ी मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय शिया (खासतौर पर हजारा शिया) और अहमदिया पिछले कुछ सालों में हिंसा और हमलों का ज्यादा शिकार हुए हैं। नवंबर 2024 में ही कुर्रम जिले में एक काफिले पर हुए हमले में 40 से ज्यादा शिया यात्रियों की हत्या कर दी गई थी। पंजाब और सिंध में भी कट्टरपंथी भीड़ ने अहमदिया इबादतगाहों पर हमला किया और लोगों को पीट-पीटकर मार डाला।

मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह कोई इक्का-दुक्का घटना नहीं है, बल्कि एक तरह का संगठित सांप्रदायिक हमला है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि हाल ही में इस्लामिक स्टेट ऑफ पाकिस्तान ने इस्लामाबाद की एक शिया मस्जिद पर आत्मघाती हमला किया, जिसमें 32 लोग मारे गए।

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी कहा है कि पाकिस्तान की सरकार हजारा शिया समुदाय को बार-बार हो रहे हमलों से बचाने में नाकाम रही है।

–आईएएनएस

एवाई/एबीएम

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