बांग्लादेश बार चुनावों में कथित राजनीतिक दखल पर मानवाधिकार संगठन ने चिंता जताई

Summary :

पेरिस, 1 जून (आईएएनएस)। हाल ही में बांग्लादेश के अलग-अलग प्रांतों में बार एसोसिएशन चुनाव हुए। चुनावों के दौरान राजनीतिक बहिष्कार, डराने-धमकाने और चुनावी प्रक्रिया में बाधा डालने के आरोप लगे। एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने इस पर चिंता जताई है। संगठन ने कहा है कि देश की कानूनी व्यवस्था में वकीलों और लोकतांत्रिक संस्थानों पर बढ़ते दबाव का यह एक संकेत ठीक नहीं है। फ्रांस स्थित संगठन जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश इन फ्रांस (जेएमबीएफ) ने अपनी ताजा रिपोर्ट “साइलेंसिंग द लीगल प्रोफेशन: एस्किलेटिंग इंटिमिडेशन, एक्सक्लूशन, एंड ऑब्स्ट्रकशन ऑफ बार एसोसिएशन इलेक्शन्स इन बांग्लादेश (17 फरवरी–30 मई 2026)” (कानूनी पेशेवरों…

पेरिस, 1 जून (आईएएनएस)। हाल ही में बांग्लादेश के अलग-अलग प्रांतों में बार एसोसिएशन चुनाव हुए। चुनावों के दौरान राजनीतिक बहिष्कार, डराने-धमकाने और चुनावी प्रक्रिया में बाधा डालने के आरोप लगे। एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने इस पर चिंता जताई है। संगठन ने कहा है कि देश की कानूनी व्यवस्था में वकीलों और लोकतांत्रिक संस्थानों पर बढ़ते दबाव का यह एक संकेत ठीक नहीं है।

फ्रांस स्थित संगठन जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश इन फ्रांस (जेएमबीएफ) ने अपनी ताजा रिपोर्ट “साइलेंसिंग द लीगल प्रोफेशन: एस्किलेटिंग इंटिमिडेशन, एक्सक्लूशन, एंड ऑब्स्ट्रकशन ऑफ बार एसोसिएशन इलेक्शन्स इन बांग्लादेश (17 फरवरी–30 मई 2026)” (कानूनी पेशेवरों को चुप कराना: बांग्लादेश में बार एसोसिएशन के चुनावों में बढ़ती धमकी, बहिष्कार और रुकावट) में उन वकीलों के खिलाफ दमन के कथित मामलों का उल्लेख किया है, जिन्हें अवामी लीग और उससे जुड़े संगठनों का समर्थक माना जाता है।

रिपोर्ट के निष्कर्ष 17 फरवरी से 30 मई के बीच हुए बार एसोसिएशन चुनावों से संबंधित जानकारी पर आधारित हैं। ये चुनाव बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान आयोजित किए गए थे।

जेएमबीएफ के अनुसार, ये घटनाएं अलग-अलग नहीं थीं, बल्कि बांग्लादेश की कानूनी संस्थाओं, यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन जैसी महत्वपूर्ण संस्था में भी, एक सुनियोजित और बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाती हैं।

रिपोर्ट में करीब 23 बार एसोसिएशन चुनावों में कथित अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है, जिससे लगभग 365 वकीलों और उम्मीदवारों पर इसका असर पड़ा। ये मामले 334 कार्यकारी समिति पदों से जुड़े थे।

जेएमबीएफ ने कहा, “रिपोर्ट किए गए मामलों में उम्मीदवारों को जबरन चुनाव न लड़ने के लिए मजबूर करना, नामांकन पत्र प्राप्त करने से रोकना, नामांकन दाखिल होने के बाद उसे रद्द करना, डराना-धमकाना और हिंसा की धमकी देना शामिल था। सामूहिक रूप से इन प्रथाओं ने बांग्लादेश के कानूनी पेशे में लोकतांत्रिक भागीदारी को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।”

रिपोर्ट के अनुसार, सबसे आम तरीका ‘जबरन निर्विरोध चुनाव’ था, जो 14 बार एसोसिएशनों में देखने को मिला। इससे लगभग 188 वकील और उम्मीदवार प्रभावित हुए और 181 कार्यकारी समिति पदों पर इसका असर पड़ा।

रिपोर्ट में कहा गया, “आवामी लीग से जुड़े माने जाने वाले कई वकीलों ने कथित झूठे आपराधिक मामलों, गिरफ्तारी, धमकियों, राजनीतिक दबाव और व्यक्तिगत सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण चुनाव लड़ने से परहेज किया। कई मामलों में विपक्षी उम्मीदवारों की अनुपस्थिति के कारण बीएनपी समर्थित उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए, जिससे वास्तविक चुनावी प्रतिस्पर्धा समाप्त हो गई।”

जेएमबीएफ ने चेतावनी दी कि बार एसोसिएशन चुनावों में बहिष्कार और डराने-धमकाने का यह पैटर्न कानूनी पेशे की स्वतंत्रता, पेशेवर संस्थाओं के लोकतांत्रिक संचालन और बांग्लादेश में कानून के शासन के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है।

संगठन ने कहा, “बार एसोसिएशन न्यायपालिका की स्वतंत्रता की रक्षा, कानूनी अधिकारों के संरक्षण और न्याय व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन संस्थाओं में भागीदारी को राजनीतिक आधार पर सीमित करने या उन्हें राजनीतिक रंग देने का कोई भी प्रयास कानूनी पेशे और लोकतांत्रिक शासन की अखंडता को कमजोर करता है।”

जेएमबीएफ ने बांग्लादेश सरकार, बार एसोसिएशन प्राधिकरणों, न्यायिक संस्थाओं और अन्य संबंधित पक्षों से बार एसोसिएशन चुनावों को स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी और समावेशी बनाने की अपील की है।

संगठन ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं, कानूनी संगठनों और लोकतांत्रिक साझेदारों से भी बांग्लादेश में कानूनी पेशे की स्वतंत्रता से जुड़े घटनाक्रमों पर करीबी नजर रखने का आग्रह किया। साथ ही इस बात पर जोर दिया कि वकीलों को बिना किसी डर, भेदभाव या राजनीतिक प्रतिशोध के पेशेवर संस्थाओं में स्वतंत्र रूप से भाग लेने का अधिकार मिलना चाहिए।

–आईएएनएस

केआर/

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

News Desk

News Desk is the editorial team of Punjab Kesari. This article is based on information provided by IANS.